Edited By Sunita sarangal, Updated: 23 Sep, 2026 03:05 PM

यह जनहित याचिका पुलवामा के नेवा में गैर-कानूनी कचरा डंपिंग साइट और स्लज ट्रीटमेंट फैसिलिटी से जुड़े आरोपों के बारे में है।
श्रीनगर(मीर आफताब): जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने पुलवामा के नेवा में कथित तौर पर गैर-कानूनी तरीके से कचरा फेंकने और स्लज ट्रीटमेंट फैसिलिटी (कीचड़ शोधन केंद्र) से जुड़ी एक जनहित याचिका (PIL) में अपने पहले के निर्देशों का पालन न करने के मामले को गंभीरता से लिया है।
चीफ जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस रजनेश ओसवाल की डिवीजन बेंच ने कोर्ट के निर्देशों का पालन न करने पर तीन वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ 10-10 हजार का जमानती वारंट जारी किया। ये वारंट पुलवामा के डिप्टी कमिश्नर, पुलवामा म्युनिसिपल काउंसिल के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर और J&K पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के मेंबर सेक्रेटरी के खिलाफ जारी किए गए हैं।
कार्यवाही के अनुसार, कोर्ट ने 4 अगस्त, 2026 को अधिकारियों को अपने निर्देशों का पालन करने (जिसमें जरूरी हलफनामे दाखिल करना भी शामिल था) के लिए "आखिरी और अंतिम मौका" दिया था। हालांकि, अधिकारियों ने न तो जरूरी हलफनामे जमा किए और न ही बेंच के सामने व्यक्तिगत रूप से पेश हुए। मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए, हाईकोर्ट ने इस व्यवहार को अपने पहले के आदेश का "पूरी तरह से उल्लंघन" बताया। बेंच ने संबंधित सीनियर सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (SSP) को निर्देश दिया है कि वे जमानती वारंट पर अमल करें और सुनवाई की अगली तारीख पर तीनों अधिकारियों की कोर्ट में व्यक्तिगत उपस्थिति सुनिश्चित करें।
यह जनहित याचिका पुलवामा के नेवा में गैर-कानूनी कचरा डंपिंग साइट और स्लज ट्रीटमेंट फैसिलिटी से जुड़े आरोपों के बारे में है। याचिका में पर्यावरण संबंधी नियमों और लागू कानूनी प्रावधानों के कथित उल्लंघन के मुद्दे उठाए गए हैं। ये नए निर्देश न्यायिक आदेशों के पालन और पर्यावरण सुरक्षा व जनहित से जुड़े मामलों में संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही पर कोर्ट के जोर को रेखांकित करते हैं।
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