Edited By Neetu Bala, Updated: 05 Oct, 2026 06:34 PM

परगवाल अंतरराष्ट्रीय सीमा क्षेत्र में SRTC बस सेवा को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ता ही जा रहा है।
परगवाल ( रोहित मिश्रा ) : परगवाल अंतरराष्ट्रीय सीमा क्षेत्र में SRTC बस सेवा को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ता ही जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार की ओर से हर बार बस सेवा शुरू करने के नाम पर आश्वासन दिया जाता है, एक-दो बार बस चलती है और उसके बाद सेवा फिर बंद कर दी जाती है। आखिर कब तक सीमावर्ती क्षेत्र के लोगों को आश्वासनों का झुनझुना थमाया जाता रहेगा?
सबसे गंभीर स्थिति उन छात्राओं की है, जो उच्च शिक्षा के लिए प्रतिदिन जम्मू के कॉलेजों का रुख करती हैं। परगवाल क्षेत्र की बेटियों को कॉलेज पहुंचने के लिए करीब 50 किलोमीटर तक का सफर तय करना पड़ता है। परिवहन की उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण उन्हें दूसरे साधनों पर निर्भर रहना पड़ता है। कई बार साधन समय पर उपलब्ध नहीं होने से छात्राएं समय पर कॉलेज नहीं पहुंच पातीं और उनकी पढ़ाई प्रभावित होती है।
वहीं, दिनभर की पढ़ाई के बाद जब बेटियां वापस घर लौटती हैं तो कई बार रास्ते में ही अंधेरा हो जाता है। ऐसे में घर बैठे माता-पिता की चिंता बढ़ जाती है। जिस उम्र में बेटियों के हाथों में किताबें और सपनों की उड़ान होनी चाहिए, उस उम्र में उन्हें रोजाना लंबा और कठिन सफर तय करने की मजबूरी आखिर क्यों? यह सवाल अब सीमावर्ती ग्रामीण जम्मू-कश्मीर सरकार और संबंधित विभाग से पूछ रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि परगवाल से जम्मू के लिए नियमित SRTC बस सेवा शुरू कर दी जाए तो छात्र-छात्राओं को बड़ी राहत मिलेगी। बेटियां समय पर कॉलेज पहुंच सकेंगी और शाम को सुरक्षित समय पर अपने घर लौट सकेंगी। इससे अभिभावकों की चिंता भी कम होगी।
इस मौके पर गांव के सरपंच पंडित रामस्वरूप शर्मा तथा समाजसेवक काली सिंह मनहास सहित अन्य ग्रामीणों ने सरकार से मांग की कि परगवाल से जम्मू के लिए नियमित एसआरटीसी बस सेवा तत्काल बहाल की जाए।
ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार ने जल्द ही बस सेवा शुरू नहीं की तो आने वाले दिनों में सीमावर्ती क्षेत्र के ग्रामीण एक बड़ा और उग्र प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होंगे। इसके बाद उत्पन्न होने वाली किसी भी स्थिति की पूरी जिम्मेदारी जम्मू-कश्मीर सरकार तथा संबंधित विभाग की होगी।
ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल बस सेवा की मांग नहीं, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्र के बच्चों की शिक्षा, बेटियों की सुरक्षा और उनके उज्ज्वल भविष्य का सवाल है। सरकार को अब आश्वासन नहीं, बल्कि धरातल पर व्यवस्था करके दिखानी होगी क्योंकि कॉलेज की बेटियों को के घंटे करना पड़ता इंतजार कई बार गाड़ियां मिलती है और कई बार नहीं।
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