Edited By Sunita sarangal, Updated: 02 Oct, 2026 12:37 PM

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने संबंधित अधिकारियों को शिकायतकर्त्ता/पीड़ितों के साथ मिलकर जांच करने, कानून के अनुसार उचित कार्रवाई करने और की गई कार्रवाई के बारे में शिकायतकर्त्ता को सूचित करने के निर्देश दिए है और चार सप्ताह के भीतर की गई कार्रवाई की...
जम्मू(कमल): राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एन.एच.आर.सी.) ने जम्मू-कश्मीर के संबंधित अधिकारियों को उधमपुर जिले की रामनगर तहसील के उन 4 बच्चों के मामले की जांच करने के निर्देश जारी किए है जो कथित तौर पर 2019-20 की त्रासदी के दौरान घटिया कफ सिरप (‘कोल्ड बैस्ट-पी.सी.’) पीने के बाद स्थायी रूप से विकलांग हो गए थे।
यह निर्देश वरिष्ठ सामाजिक और स्वास्थ्य कार्यकर्ता सुकेश सी. खजुरिया की शिकायत पर दिया गया है जिसमें जीवित बचे चार बच्चों के लिए उचित मुआवजा, चिकित्सा देखभाल और पुनर्वास की मांग की गई थी।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने संबंधित अधिकारियों को शिकायतकर्त्ता/पीड़ितों के साथ मिलकर जांच करने, कानून के अनुसार उचित कार्रवाई करने और की गई कार्रवाई के बारे में शिकायतकर्त्ता को सूचित करने के निर्देश दिए है और चार सप्ताह के भीतर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट (ए.टी.आर.) मांगी गई है।
शिकायत में कहा गया है कि हालांकि चारों बच्चे त्रासदी से बच गए लेकिन वे स्थायी रूप से विकलांग हो गए। उनके मामलों के समर्थन में मुख्य चिकित्सा अधिकारी, उधमपुर द्वारा जारी विकलांगता प्रमाण पत्र भी रिकॉर्ड में रखे गए थे।
यह मामला काला अम्ब हिमाचल प्रदेश में स्थित एक कंपनी द्वारा निर्मित कोल्ड बेस्ट-पीसी सिरप से संबंधित है। शिकायत में उल्लिखित प्रयोगशाला जांच में सिरप के एक नमूने में 34.24 प्रतिशत डब्ल्यू/वी डायथिलीन ग्लाइकोल (डी.ई.जी.) पाया गया था। डी.ई.जी. एक जहरीला औद्योगिक रसायन है और मनुष्यों के सेवन के लिए असुरक्षित है।
कब का है मामला
घटिया/नकली कफ सिरप त्रासदी के कारण पहले दिसम्बर 2019 और जनवरी 2020 के दौरान रामनगर क्षेत्र में बच्चों की मौत हुई थी। पिछली कार्यवाही में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने जे.एंडके. ड्रग्स विभाग की ओर से खामियां पाई थीं और मृत बच्चों के निकटतम परिजनों को 3 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया था।
बाद में आयोग के आदेश को जे.एंडके. और लद्दाख के माननीय उच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया था। खजुरिया का कहना है कि जहां मौतों से जुड़े मामलों में मुआवजा दिया गया था, वहीं जीवन भर विकलांगता से जूझ रहे जीवित बच्चों को भी उचित वित्तीय सहायता, निरंतर चिकित्सा देखभाल और पुनर्वास की आवश्यकता है।
उन्होंने रैगुलेटरी कमियों के लिए जिम्मेदारी तय करने और दवा की क्वालिटी की जांच, निगरानी और लागू करने के सिस्टम को मजबूत करने की भी मांग की है, ताकि ऐसी दुखद घटनाएं दोबारा न हों।
आयोग के हालिया दखल ने एक बार फिर बचे हुए पीड़ितों की हालत को मानवाधिकार संस्था के सामने ला दिया है और मामले को जांच और उचित कार्रवाई के लिए जम्मू-कश्मीर के अधिकारियों के सामने रखा है।
चूंकि आयोग ने इस चरण में जांच का आदेश दिया है और 4 हफ्ते के अंदर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने अभी तक मौजूदा कार्यवाही में बचे हुए 4 बच्चों को मुआवजा नहीं दिया है।
अपने शहर की खबरें Whatsapp पर पढ़ने के लिए Click Here
जम्मू-कश्मीर की खबरें Instagram पर पढ़ने के लिए हमें Join करें Click Here