Edited By Neetu Bala, Updated: 05 Oct, 2026 04:31 PM

याचिकाकर्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी, राकेश कुमार सिंह और सुधाकर सिंह की ओर से पेश वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने दलील दी कि चुनाव आयोग एक बहु-सदस्यीय निकाय है और फैसले या तो सर्वसम्मति से या बहुमत से लिए जाने चाहिए।
जम्मू-कश्मीर ( तनवीर ) : मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को तत्काल कोई अंतरिम आदेश देने से इनकार कर दिया है और चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच तीन याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि CEC ने दो अन्य चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभ्यास पर एकतरफा फैसले लिए हैं।
कोर्ट में क्या हुआ?
याचिकाकर्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी, राकेश कुमार सिंह और सुधाकर सिंह की ओर से पेश वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने दलील दी कि चुनाव आयोग एक बहु-सदस्यीय निकाय है और फैसले या तो सर्वसम्मति से या बहुमत से लिए जाने चाहिए। सिंह ने CEC को निलंबित करने के लिए अंतरिम आदेश की मांग की और कोर्ट से आग्रह किया कि वह निर्देश दे कि जब तक मामला लंबित है, तब तक फैसले सर्वसम्मति से या कम से कम बहुमत से लिए जाएं।
हालांकि, CJI ने बताया कि आरोप खबरों पर आधारित हैं। कोर्ट ने कहा, "यह संभव है कि यह पूरी तरह से सही हो या आंशिक रूप से सही हो।" सिंह ने कहा कि चुनाव आयोग ने प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से इन रिपोर्टों का खंडन नहीं किया है।
कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग के कामकाज को नियंत्रित करने वाला पहले से ही एक कानून है और उम्मीद जताई कि उसका पालन किया जा रहा है और आगे भी किया जाता रहेगा। "हम याचिका पर नोटिस जारी कर रहे हैं," बेंच ने कहा और ECI और तीनों चुनाव आयुक्तों को जवाब देने का निर्देश दिया।
कोर्ट ने कोई तत्काल आदेश देने से भी इनकार कर दिया, यह कहते हुए कि 10 दिनों से कोई बड़ा फर्क नहीं पड़ेगा और यदि कुछ गलत किया गया पाया गया तो उसे बाद में रद्द किया जा सकता है।
"यह याचिका एक समाचार रिपोर्ट पर आधारित है जो 100 प्रतिशत सही, आंशिक रूप से सही या गलत हो सकती है। हम समाचार रिपोर्ट के आधार पर आदेश नहीं दे सकते," कोर्ट ने टिप्पणी की।
सिंह ने चुनौती दिए गए फैसलों से संबंधित रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने के निर्देश की भी मांग की, लेकिन कोर्ट ने इस अनुरोध पर कोई आदेश पारित नहीं किया। मामले की सुनवाई अगले हफ्ते फिर होगी।
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