Edited By Neetu Bala, Updated: 07 Aug, 2026 02:09 PM

कैंसर के बढ़ते मामलों के बीच, यह पहल कई लोगों के लिए उम्मीद की किरण बनकर उभरी है।
शोपियां ( मीर आफताब ) : पूरे कश्मीर में आधुनिक और प्रगतिशील खेती तेजी से लोकप्रिय हो रही है। कैंसर के बढ़ते मामलों के बीच, यह पहल कई लोगों के लिए उम्मीद की किरण बनकर उभरी है। जानकारों का मानना है कि सेब के बागों और सब्जियों की खेती में केमिकल वाले कीटनाशकों का ज़्यादा इस्तेमाल इंसानी सेहत पर बुरा असर डाल सकता है। इन चिंताओं को देखते हुए, अब ज्यादा से ज्यादा किसान प्राकृतिक और ऑर्गेनिक खेती के तरीकों को अपना रहे हैं।
प्रगतिशील खेती का मुख्य मकसद केमिकल वाले कीटनाशकों का इस्तेमाल कम करना और साथ ही सुरक्षित व अच्छी क्वालिटी की फसल उगाना है। यह वर्मीकम्पोस्ट, ऑर्गेनिक खाद और खेती के दूसरे प्राकृतिक व घरेलू तरीकों के इस्तेमाल को बढ़ावा देती है, जिससे मिट्टी की उपजाऊ क्षमता बनी रहती है और सेहत से जुड़े जोखिम कम होते हैं।
शोपियां के हारून रशीद इस बदलाव की एक प्रेरणादायक मिसाल हैं। उन्होंने अपने घर की छत पर एक शानदार खेती का सेटअप तैयार किया है, जहां वे 100 से ज़्यादा तरह की सब्जियां और दुर्लभ पौधे उगाते हैं। इनमें कई ऐसी किस्में भी शामिल हैं जो आमतौर पर कश्मीर में नहीं मिलतीं। अपनी लगन और नए तरीकों से वे लगभग ₹70,000 की कमाई करते हैं और साथ ही अपने परिवार को ताजी, केमिकल-मुक्त सब्जियां भी उपलब्ध कराते हैं।
हारून रशीद का कहना है कि थोड़ी-सी कोशिश और सही जानकारी के साथ, लोग प्रगतिशील खेती अपनाकर आत्मनिर्भर बन सकते हैं, अतिरिक्त कमाई कर सकते हैं और अपने परिवार को सुरक्षित, सेहतमंद और पौष्टिक भोजन दे सकते हैं।
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