Edited By Sunita sarangal, Updated: 20 Oct, 2026 01:29 PM

बारामूला का कश्मीर की हिंदू धार्मिक और आध्यात्मिक परंपराओं में विशेष स्थान है।
बारामूला(रिजवान मीर): उत्तरी कश्मीर के बारामूला में नवरात्रि का पर्व धार्मिक श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। इस अवसर पर कश्मीरी पंडित श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के बीच आपसी सद्भाव, सांस्कृतिक विरासत और भाईचारे की खूबसूरत झलक देखने को मिल रही है।
बारामूला का कश्मीर की हिंदू धार्मिक और आध्यात्मिक परंपराओं में विशेष स्थान है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस क्षेत्र को मां शैलपुत्री की पवित्र भूमि के रूप में जाना जाता है।
झेलम नदी (वितस्ता) के किनारे स्थित प्राचीन शैलपुत्री मंदिर, जिसे देविबल के नाम से भी जाना जाता है, नवरात्रि समारोह का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। यहां श्रद्धालु मां के दर्शन करने, पूजा-अर्चना करने और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए पहुंचते हैं।
कश्मीरी शक्ति परंपराओं के अनुसार, कश्मीर घाटी के विभिन्न पवित्र स्थलों का संबंध मां दुर्गा के नौ स्वरूपों से माना जाता है। इसी परंपरा में बारामूला को मां शैलपुत्री से जुड़ी विशेष धार्मिक मान्यता प्राप्त है, जिसके चलते नवरात्रि के दौरान इस स्थान का महत्व और बढ़ जाता है।
धार्मिक आस्था के साथ-साथ नवरात्रि का यह पर्व कश्मीर की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता और आपसी भाईचारे की परंपरा को भी उजागर करता है। यह उत्सव विभिन्न समुदायों के बीच प्रेम, सम्मान और सद्भाव को मजबूत करने का संदेश देता है।
बारामूला में नवरात्रि का आयोजन इस बात का प्रतीक है कि धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत लोगों को जोड़ने तथा समाज में शांति, एकता और आपसी विश्वास को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
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