Edited By Neetu Bala, Updated: 28 Sep, 2026 08:11 PM

ट्रायल लगभग नौ साल तक चला। कार्यवाही के दौरान जाबेर हुसैन हिरासत में रहे, जबकि अन्य दो आरोपियों को हाई कोर्ट के आदेशों के बाद जमानत पर रिहा कर दिया गया।
राजौरी (शिवम बख्शी) : राजौरी की एडिशनल सेशन जज सुदेश शर्मा की अदालत ने सोमवार को शमशाद अख्तर मर्डर केस में तीनों आरोपियों को बरी कर दिया है। इसके साथ ही लगभग 9 साल से चल रहा ट्रायल खत्म हो गया। अदालत ने 'स्टेट बनाम जाबेर हुसैन और अन्य' मामले में अपना फैसला सुनाया। रिकॉर्ड पर मौजूद सबूतों और सामग्री की जांच के बाद जाबेर हुसैन, रुखसाना कौसर और यास्मीन कौसर को सभी आरोपों से बरी कर दिया गया।
यह मामला 2017 का है, जब आरोपी जाबेर हुसैन की पत्नी शमशाद अख्तर की मौत के सिलसिले में राजौरी पुलिस स्टेशन में FIR नंबर 264/2017 दर्ज की गई थी। अभियोजन पक्ष का मामला 12-13 अगस्त 2017 की रात का था। इसके बाद रणबीर दंड संहिता (RPC) की धाराओं 302, 201 और 109 के तहत तीनों आरोपियों के खिलाफ अदालत में चार्जशीट पेश की गई। ट्रायल लगभग नौ साल तक चला। कार्यवाही के दौरान जाबेर हुसैन हिरासत में रहे, जबकि अन्य दो आरोपियों को हाई कोर्ट के आदेशों के बाद जमानत पर रिहा कर दिया गया।
ट्रायल पूरा होने के बाद, एडिशनल सेशन जज ने अभियोजन और बचाव पक्ष द्वारा पेश किए गए सबूतों और रिकॉर्ड पर रखी गई अन्य सामग्री की जांच की और तीनों आरोपियों को बरी करने का आदेश दिया।
आरोपियों का प्रतिनिधित्व पीर पंजाल क्षेत्र के प्रमुख वकील और पूर्व MLC मुर्तजा खान ने किया, जबकि वकील शौकत अली खिजरी ने इस मामले में उनकी सहायता की। अभियोजन पक्ष का प्रतिनिधित्व एडिशनल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर ने किया, जिनकी सहायता वकील चौधरी लियाकत और उनके बेटे वकील चौधरी नसीम लियाकत ने की।
मुर्तजा खान, जो अभी निजी दौरे पर अमेरिका (USA) में हैं, उपलब्ध ऑनलाइन सुविधाओं के माध्यम से कार्यवाही से जुड़े रहे। सुनवाई के दौरान, शौकत अली खिजरी अदालत में पेश हुए और उन्होंने आरोपी का पक्ष रखने और उनकी मदद करने में अहम भूमिका निभाई।
फैसला सुनाए जाने के साथ ही, राजौरी के एडिशनल सेशन जज के सामने जाबेर हुसैन, रुखसाना कौसर और यास्मीन कौसर के खिलाफ चल रहा मुकदमा खत्म हो गया।
फैसले का स्वागत करते हुए, बचाव पक्ष की टीम ने कहा कि आरोपी ने न्यायिक प्रक्रिया पर पूरा भरोसा बनाए रखा और कानूनी तरीकों से न्याय पाने की कोशिश करते हुए कार्यवाही का सामना करते रहे।
बचाव पक्ष ने सबूतों की बारीकी से जांच करने और कानून के मुताबिक मामले का फैसला करने के लिए अदालत की तारीफ भी की।
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