Edited By Sunita sarangal, Updated: 20 Oct, 2026 02:58 PM
स्थानीय स्तर पर उठाए जा रहे इन सवालों के बीच सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि आखिर शहर के कचरे का वैज्ञानिक और पर्यावरण के अनुकूल निस्तारण कहां किया जा रहा है...
राजौरी(अमित शर्मा): राजौरी शहर में कचरा प्रबंधन की समस्या एक बार फिर चर्चा में है। शहर के विभिन्न क्षेत्रों में कचरे के निस्तारण, सलानी पुल के आसपास कचरे के बड़े-बड़े ढेर और नदी-नालों के प्रदूषण को लेकर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप हैं कि रात के समय जे.सी.बी. मशीनों और कचरे से भरे वाहनों के माध्यम से कचरे को विभिन्न स्थानों पर डंप किया जाता है। साथ ही, कचरा जलाए जाने से उठने वाले धुएं को लेकर भी चिंता जताई जा रही है।
स्थानीय स्तर पर उठाए जा रहे इन सवालों के बीच सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि आखिर शहर के कचरे का वैज्ञानिक और पर्यावरण के अनुकूल निस्तारण कहां किया जा रहा है और यदि नियमों का उल्लंघन हो रहा है, तो इसके लिए जिम्मेदारी किसकी तय होगी?

सलानी पुल क्षेत्र में कचरे के ढेर, नदी-नालों पर बढ़ता दबाव
राजौरी के सलानी पुल क्षेत्र में कचरे के जमाव को लेकर चिंता व्यक्त की जा रही है। आरोप है कि नदी और नालों के आसपास दोनों तरफ कचरे के बड़े-बड़े ढेर जमा हैं और कुछ स्थानों पर कचरा जलाया भी जाता है। यदि इन आरोपों की पुष्टि होती है, तो यह पर्यावरण संरक्षण और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिहाज से गंभीर विषय होगा।
नदी-नालों में कचरा पहुंचने से पानी की गुणवत्ता प्रभावित होने, जल निकासी बाधित होने और आसपास के पर्यावरण को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है। वहीं, खुले में कचरा जलाने से निकलने वाला धुआं वायु प्रदूषण बढ़ा सकता है।
राजौरी में बहने वाली नदियों के पानी की वास्तविक स्थिति का पता लगाने के लिए संबंधित विभागों द्वारा जल गुणवत्ता की जांच और उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक किया जाना आवश्यक है।
रात के अंधेरे में कचरा डंपिंग के आरोप, जांच की मांग
स्थानीय स्तर पर यह आरोप लगाया जा रहा है कि दिन के समय सफाई के बाद रात में कचरे को विभिन्न स्थानों पर जमा किया जाता है और बाद में उसे नदी-नालों के आसपास फेंका जाता है। इस संबंध में नगर परिषद की भूमिका पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और जिम्मेदार व्यक्तियों की पहचान के लिए निष्पक्ष जांच आवश्यक है। प्रशासन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि शहर से प्रतिदिन कितना कचरा एकत्र किया जा रहा है, उसे कहां ले जाया जाता है और उसके अंतिम निस्तारण की व्यवस्था क्या है।
यदि किसी भी स्तर पर नियमों के विरुद्ध कचरा डंप करने या जलाने की पुष्टि होती है, तो संबंधित व्यक्तियों और अधिकारियों की जवाबदेही कानून के अनुसार तय की जानी चाहिए।

पहले भी प्रदर्शन और भूख हड़ताल का दावा
इस मुद्दे को लेकर पहले भी विरोध प्रदर्शन और भूख हड़ताल किए जाने की जानकारी दी गई है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, सुशील बजरंगी द्वारा भूख हड़ताल किए जाने के बाद बालकृष्ण शर्मा, राधी शर्मा और ह्यूमन राइट वॉच से जुड़े लोगों की ओर से भी विरोध प्रदर्शन किया गया था।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि उन्होंने कई बार कचरा प्रबंधन और प्रदूषण के मुद्दे को उठाया, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया। उनका सवाल है कि यदि लंबे समय से यह मामला उठाया जा रहा है, तो अब तक ऐसी व्यवस्था क्यों नहीं बनाई गई जिससे कचरे का निस्तारण नदी-नालों और आबादी से दूर, निर्धारित नियमों के अनुसार किया जा सके?
इन घटनाओं की तिथियों, संबंधित संगठनों की भूमिका और प्रशासन को दिए गए ज्ञापनों की पुष्टि उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर की जानी चाहिए।
67 लाख रुपये के चालान और NGT की कार्यवाही का भी उल्लेख
शिकायतकर्ताओं के अनुसार, पहले इस मामले को लेकर लगभग 67 लाख रुपये के चालान की कार्रवाई का भी उल्लेख किया गया था। इसके अतिरिक्त, राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) में चल रही कार्यवाही के संदर्भ में 5 करोड़ 66 लाख रुपये से अधिक की राशि लगाए जाने का दावा किया जा रहा है।
इन राशियों की प्रकृति, संबंधित आदेशों, भुगतान की स्थिति और कार्रवाई के दायरे की पुष्टि आधिकारिक दस्तावेजों से किया जाना जरूरी है। यह स्पष्ट होना चाहिए कि संबंधित राशि पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति, जुर्माने या किसी अन्य आदेश के तहत निर्धारित की गई है और उसका भुगतान करने की जिम्मेदारी किस संस्था पर है।
यदि NGT या किसी सक्षम प्राधिकरण द्वारा कोई आदेश जारी किया गया है और उसका अनुपालन नहीं हुआ है, तो संबंधित आदेश के अनुसार आगे की कार्रवाई और अनुपालन की स्थिति सार्वजनिक की जानी चाहिए।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और नगर परिषद से जवाबदेही की मांग
इस पूरे मामले में जम्मू-कश्मीर प्रदूषण नियंत्रण समिति (JKPCC), नगर परिषद और जिला प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। संबंधित एजेंसियों से अपेक्षा है कि वे कचरा डंपिंग स्थलों का निरीक्षण करें, नदी-नालों के पानी के नमूनों की जांच कराएं और खुले में कचरा जलाए जाने की शिकायतों पर उचित कार्रवाई करें।
इसके साथ ही, कचरा एकत्र करने से लेकर उसके अंतिम निस्तारण तक की प्रक्रिया का रिकॉर्ड सार्वजनिक किया जाना चाहिए। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि समस्या कहां उत्पन्न हो रही है और सुधार के लिए किन कदमों की आवश्यकता है।
यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही अथवा नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
राजौरी की ऐतिहासिक पहचान और पर्यावरण संरक्षण का सवाल
राजौरी अपनी ऐतिहासिक विरासत, सांस्कृतिक पहचान और प्राकृतिक परिवेश के लिए जाना जाता है। ऐसे में शहर के आसपास कचरे का अनियंत्रित जमाव और नदी-नालों के प्रदूषण की शिकायतें चिंता का विषय हैं।
शहर को स्वच्छ बनाए रखना केवल नगर परिषद की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि संबंधित विभागों, प्रशासन और नागरिकों की साझा जिम्मेदारी भी है। हालांकि, ठोस कचरा प्रबंधन की व्यवस्था सुनिश्चित करना और पर्यावरण संबंधी नियमों का पालन कराना संबंधित प्राधिकरणों का दायित्व है।
सबसे बड़ा सवाल - जिम्मेदारी कौन लेगा?
राजौरी के सामने आज सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि शहर से निकलने वाले कचरे के निस्तारण के लिए स्थायी और वैज्ञानिक व्यवस्था कब लागू होगी। क्या नदी-नालों के आसपास जमा कचरे को हटाने, प्रदूषण की जांच कराने और भविष्य में ऐसी स्थिति रोकने के लिए समयबद्ध योजना बनाई जाएगी?
स्थानीय स्तर पर उठ रही चिंताओं के बीच प्रशासन और संबंधित विभागों को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। निष्पक्ष जांच, पारदर्शिता और नियमों के अनुसार कार्रवाई ही इस समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकते हैं।
राजौरी को स्वच्छ रखना केवल एक नारा नहीं, बल्कि पर्यावरण, जनस्वास्थ्य और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ी जिम्मेदारी है। अब देखना यह है कि संबंधित विभाग इन सवालों पर क्या कदम उठाते हैं।
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