Edited By Sunita sarangal, Updated: 27 May, 2026 10:28 AM
बारामूला/जम्मू/श्रीनगर(रिजवान मीर/तनवीर सिंह/मीर आफताब): बारामूला के ईदगाह कदीम शेरी खास में ईद-उल-अज़हा की नमाज़ बड़े धार्मिक उत्साह और अकीदत के साथ अदा की गई, जिसमें हजारों लोगों ने भाग लिया। ईदगाह कदीम को बारामूला का सबसे बड़ा ईदगाह माना जाता है, जहां हर साल बड़ी संख्या में लोग ईद की नमाज़ अदा करने पहुंचते हैं।
इस अवसर पर मौलाना तारिक अहमद नापा साहिब ने ईद की नमाज़ अदा कराई और लोगों को ईद-उल-अज़हा की अहमियत, कुर्बानी, भाईचारे और इंसानियत का संदेश दिया।
बारामूला में सबसे बड़ी ईद की तकरीब ईदगाह कदीम में आयोजित हुई, जहां नमाज़ के बाद लोगों ने एक-दूसरे से गले मिलकर ईद की मुबारकबाद पेश की। बच्चों में भी ईद को लेकर खासा उत्साह देखने को मिला और वे खुशी से झूमते नजर आए। पूरा माहौल भाईचारे, मोहब्बत और खुशियों से सराबोर नजर आया।
वहीं जम्मू के रेजिडेंसी रोड में आज सुबह ईद उल अधा की नमाज अदा की गई और सबको गले लगा कर ईद की मुबारक दी गई।
वहीं बुधवार को कश्मीर भर की ईदगाहों और मस्जिदों में हज़ारों लोग ईद-उल-अज़हा की नमाज़ अदा करने के लिए जमा हुए। इस दौरान भक्ति, अपनापन और जश्न का माहौल था। कश्मीर भर में बड़ी-बड़ी जमातें देखने को मिलीं, जहां नमाज़ी सुबह-सवेरे से ही ईद की खास नमाज़ में शामिल होने के लिए इकट्ठा होने लगे थे। पूरे ज़िले में नमाज़ और ईद की मुबारकबाद की गूंज सुनाई दे रही थी, क्योंकि हर तबके के लोग इस त्योहार को पूरे धार्मिक उत्साह के साथ मनाने के लिए एक साथ आए थे।
धार्मिक गुरुओं ने जमातों को संबोधित करते हुए कुरान की आयतें पढ़ीं और ईद-उल-अज़हा की शिक्षाओं पर रोशनी डाली। उन्होंने कुर्बानी, सब्र, दया और सामाजिक ज़िम्मेदारी पर खास ज़ोर दिया। जम्मू-कश्मीर में अमन, खुशहाली और भाईचारे के लिए भी खास दुआएं मांगी गईं।
रंग-बिरंगे पारंपरिक कपड़ों में सजे बच्चे अपने परिवारों के साथ ईदगाहों तक गए, जिससे इस मौके का जश्न और भी बढ़ गया। नमाज़ के बाद, दिल को छू लेने वाले नज़ारे देखने को मिले, जब लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाया, ईद की मुबारकबाद दी और खुशी व एकता की मुस्कान बांटी। कई बच्चे खुशी-खुशी अपने दोस्तों और बड़ों को मुबारकबाद देते दिखे, जो इस त्योहार से जुड़ी एकता, प्यार और भाईचारे की भावना को दिखाता है।
नमाज़ के बाद, स्थानीय रिवाजों के मुताबिक, परिवारों ने अपने रिश्तेदारों, दोस्तों और कब्रिस्तानों का दौरा किया। वहीं, कई घरों में बाद में ईद-उल-अज़हा की खास कुर्बानी की रस्म अदा की गई, और इस तरह उन्होंने शुक्रगुज़ारी, आस्था और एकता की भावना के साथ जश्न को जारी रखा।
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