Ladakh के सभी जिलों को मिलेंगे लेह और कारगिल जैसे अधिकार, मुख्य सचिव ने किया बड़ा ऐलान

Edited By Sunita sarangal, Updated: 14 Jul, 2026 11:32 AM

autonomous hill development council for seven districts of ladakh

लद्दाख के मुख्य सचिव आशीष कुंद्रा ने पत्रकारों से बातचीत में घोषणा करते हुए कहा कि एल.ए.एच.डी.सी अधिनियम की धारा 3(1) में पहले से ही हर जिले के लिए एक काउंसिल का प्रावधान है.....

लेह/जम्मू(उदय): केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के मुख्य सचिव आशीष कुंद्रा ने सोमवार को घोषणा करते हुए कहा कि केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन सभी सात जिलों में से प्रत्येक में एक ऑटोनॉमस हिल डेवलपमेंट काउंसिल (स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद) का गठन करेगा। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण और जमीनी स्तर पर शासन की दिशा में एक बड़ा कदम बताया।

लद्दाख के मुख्य सचिव आशीष कुंद्रा ने पत्रकारों से बातचीत में घोषणा करते हुए कहा कि एल.ए.एच.डी.सी अधिनियम की धारा 3(1) में पहले से ही हर जिले के लिए एक काउंसिल का प्रावधान है जिसका गठन सरकार द्वारा राजपत्र (गजट) में अधिसूचित तारीख से किया जाएगा। अब केवल अधिनियम में जरूरी संशोधन और निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन (सीमांकन) बाकी है। अप्रैल 2026 में जब शाम, नुब्रा, चांगथांग, ज़ांस्कर और द्रास को अधिसूचित किया गया तब लद्दाख में जिलों की संख्या 2 से बढ़कर 7 हो गई। अब तक लेह और कारगिल की मौजूदा 2 काउंसिलों के पास ही निर्वाचित प्रतिनिधित्व रहा है।

मुख्य सचिव ने बताया कि केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन ने सभी 7 जिलों में से प्रत्येक में लद्दाख ऑटोनॉमस हिल डेवलपमेंट काउंसिल (एल.ए.एच.डी.सी) का गठन करने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि सातों परिषदों के पास एल.ए.एच.डी.सी अधिनियम में बताई गई पूरी शक्तियां होंगी। नए जिलों को वही अधिकार मिलेंगे, जो लेह को 1995 से और कारगिल को 2003 से मिले हुए हैं। भूमि संबंधी अधिकार के मामले में हिल काउंसिलों के पास जिले के भीतर जमीन के मालिकाना हक और जमीन के आबंटन का अधिकार होता है। शाम, नुब्रा, चांगथांग, ज़ांस्कर और द्रास अपनी-अपनी सीमाओं के भीतर उस अधिकार का इस्तेमाल करेंगे।

जिला कैडर भर्ती पर उन्होंने कहा कि परिषदें जिला कैडर के पदों के लिए भर्ती और प्रमोशन को नियंत्रित करेंगी। नए जिलों में रोजगार से जुड़े फैसले जिले के भीतर ही एक निर्वाचित परिषद द्वारा लिए जाएंगे। इसके साथ ही काउंसिलों के पास अपना परिषद फंड होता है और वे टैक्स और फीस लगा सकती हैं। हर नए जिले का अपना रेवेन्यू बेस (राजस्व का आधार) होगा। विकास परियोजनाओं पर मुख्य सचिव ने कहा कि परिषदें अपनी विकास योजनाएं खुद तैयार करेंगी। प्रत्येक जिला अपनी प्राथमिकताएं खुद तय करेगा, न कि लेह या कारगिल से उन्हें प्राप्त होगा।

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