Edited By Sunita sarangal, Updated: 30 Jun, 2026 10:37 AM

पत्रकारों से बात करते हुए मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में बताया कि ऑल कश्मीर होलसेल मटन डीलर्स यूनियन ने इस मुद्दे को उनके संज्ञान में लाया है।
जम्मू(सतीश): मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को पत्र लिखकर जम्मू-कश्मीर आने वाले पशुधन (लाइवस्टॉक) से लदे वाहनों से पंजाब में कथित रूप से की जा रही अवैध वसूली पर तत्काल हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि इस तरह की वसूली से व्यापारियों, परिवहनकर्ताओं और उपभोक्ताओं को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है, जबकि पशुओं के कल्याण पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
पत्रकारों से बात करते हुए मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में बताया कि ऑल कश्मीर होलसेल मटन डीलर्स यूनियन ने इस मुद्दे को उनके संज्ञान में लाया है। यूनियन के अनुसार जम्मू-कश्मीर के लिए पशुधन लेकर आने वाले वाहनों को पंजाब में कथित तौर पर पशु मेलों से जुड़े ठेकेदार समूहों द्वारा रास्ते में रोका जाता है और सभी वैध दस्तावेज एवं परमिट होने के बावजूद उनसे अनधिकृत शुल्क वसूला जाता है।
उमर अब्दुल्ला ने बताया कि इस मामले की जांच खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग की एक आंतरिक समिति द्वारा की गई। समिति ने अपनी रिपोर्ट में पाया कि परिवहनकर्ताओं से बिना किसी स्पष्ट कानूनी आधार के प्रत्येक वाहन से भारी राशि वसूली जा रही है।
उन्होंने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि पशुधन के परिवहन पर जी.एस.टी. लागू नहीं होता, इसके बावजूद इस प्रकार की वसूली पशुधन व्यापार पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल रही है। इसका सीधा असर जम्मू-कश्मीर में मांस की कीमतों और आम उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब और जम्मू-कश्मीर के बीच वर्षों पुराने मैत्रीपूर्ण, सामाजिक और आर्थिक संबंध रहे हैं। यदि इस प्रकार की गतिविधियां हो रही हैं, तो वे दोनों राज्यों के सहयोग और आपसी विश्वास की भावना के अनुरूप नहीं हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान से मामले की जांच कराने, वैध दस्तावेज रखने वाले पशुधन वाहनों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने तथा किसी भी प्रकार की अवैध वसूली और हस्तक्षेप पर तत्काल रोक लगाने का आग्रह किया।
उन्होंने उम्मीद जताई कि पंजाब सरकार इस मामले में न्यायपूर्ण निर्णय लेते हुए वैध दस्तावेजों के साथ आने-जाने वाले पशुधन वाहनों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करेगी। साथ ही उन्होंने कहा कि यदि आवश्यक हुआ तो केन्द्र सरकार से भी हस्तक्षेप की मांग की जाएगी, ताकि जम्मू-कश्मीर के व्यापारियों को भविष्य में किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
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