Edited By Sunita sarangal, Updated: 01 Jul, 2026 10:59 AM

जारी आदेश के अनुसार गुलमर्ग में प्रवेश करने वाले सभी निजी एवं वाणिज्यिक चार पहिया वाहनों का प्रवेश उनके पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) नंबर के अंतिम अंक के आधार पर नियंत्रित किया जाएगा।
बारामूला(रिजवान मीर): गुलमर्ग विकास प्राधिकरण (Gulmarg Development Authority) ने गुलमर्ग में बढ़ते यातायात दबाव, पर्यावरण संरक्षण तथा पर्यटन को अधिक व्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से 5 जुलाई से 5 अगस्त 2026 तक पायलट आधार पर ऑड-ईवन ट्रैफिक व्यवस्था लागू करने का आदेश जारी किया है। जारी आदेश के अनुसार गुलमर्ग में प्रवेश करने वाले सभी निजी एवं वाणिज्यिक चार पहिया वाहनों का प्रवेश उनके पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) नंबर के अंतिम अंक के आधार पर नियंत्रित किया जाएगा।
जिन वाहनों के पंजीकरण नंबर का अंतिम अंक ऑड (1, 3, 5, 7, 9) होगा, उन्हें केवल ऑड तिथियों पर ही गुलमर्ग में प्रवेश की अनुमति होगी। वहीं जिन वाहनों के अंतिम अंक ईवन (0, 2, 4, 6, 8) होंगे, उन्हें केवल ईवन तिथियों पर प्रवेश दिया जाएगा। यह व्यवस्था प्रतिदिन सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक लागू रहेगी। हालांकि, माल एवं आवश्यक वस्तुओं की ढुलाई करने वाले वाहनों को इस व्यवस्था से छूट प्रदान की गई है।
प्राधिकरण ने बताया कि हाल के समय में गुलमर्ग में वाहनों की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है, जिसके कारण भारी ट्रैफिक जाम, वायु प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण, सड़क अवसंरचना पर दबाव, आपातकालीन सेवाओं में बाधा तथा संवेदनशील पर्वतीय पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। यह पायलट परियोजना 5 जुलाई से 5 अगस्त तक प्रभावी रहेगी। इस दौरान पुलिस, ट्रैफिक पुलिस तथा संबंधित विभागों के सहयोग से यातायात प्रबंधन, पर्यावरणीय प्रभाव और पर्यटकों की सुविधा का मूल्यांकन किया जाएगा। आदेश में ट्रैफिक पुलिस, सिविल पुलिस, मोटर वाहन विभाग तथा अन्य प्रवर्तन एजेंसियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे इस व्यवस्था का सख्ती से पालन सुनिश्चित करें।
गुलमर्ग विकास प्राधिकरण ने कहा है कि पायलट परियोजना के परिणामों एवं संबंधित विभागों की सिफारिशों के आधार पर इस व्यवस्था की समीक्षा की जाएगी तथा आवश्यकता पड़ने पर इसमें संशोधन, विस्तार अथवा इसे समाप्त करने का निर्णय लिया जाएगा। प्राधिकरण ने अपने आदेश में कहा है कि गुलमर्ग एक अत्यंत संवेदनशील उच्च हिमालयी पर्यटन स्थल है, जिसकी पर्यावरणीय एवं पारिस्थितिकीय महत्ता को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है। इसका उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण, सतत पर्यटन, सार्वजनिक सुरक्षा और प्रभावी यातायात प्रबंधन को बढ़ावा देना तथा भविष्य के लिए एक टिकाऊ परिवहन व्यवस्था विकसित करना है।
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