Edited By Neetu Bala, Updated: 23 May, 2026 05:18 PM

माननीय केंद्रीय रेल मंत्री द्वारा 30 अप्रैल 2026 को हरी झंडी दिखाए जाने के बाद, ट्रेन का नियमित संचालन 2 मई 2026 से आरंभ हुआ। तब से इसने यात्रियों के बीच लोकप्रियता का नया कीर्तिमान स्थापित कर दिया है।
जम्मू ( तनवीर ) : भारतीय रेलवे और जम्मू-कश्मीर के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय जोड़ते हुए, अत्याधुनिक जम्मू-श्रीनगर वंदे भारत एक्सप्रेस ने 2 मई 2026 को वाणिज्यिक संचालन शुरू होने से लेकर 23 मई 2026 तक, मात्र 22 दिनों में एक लाख एक हजार पचास से अधिक यात्रियों को सुरक्षित एवं आरामदायक यात्रा कराने का अभूतपूर्व मील का पत्थर हासिल कर लिया है। इस स्वदेशी सेमी-हाई-स्पीड ट्रेन ने जम्मू और कश्मीर घाटी के बीच की भौगोलिक दूरी को पाटकर स्वयं को क्षेत्र की सच्ची जीवन-रेखा सिद्ध किया है।
सुगम कनेक्टिविटी का नया कीर्तिमान
माननीय केंद्रीय रेल मंत्री द्वारा 30 अप्रैल 2026 को हरी झंडी दिखाए जाने के बाद, ट्रेन का नियमित संचालन 2 मई 2026 से आरंभ हुआ। तब से इसने यात्रियों के बीच लोकप्रियता का नया कीर्तिमान स्थापित कर दिया है। ऐतिहासिक रूप से, जम्मू और श्रीनगर के बीच यात्रा राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर निर्भर थी, जो भूस्खलन और खराब मौसम के कारण अक्सर बाधित रहता था। पिछले 22 दिनों में वंदे भारत एक्सप्रेस ने उत्कृष्ट समयपालन एवं शत-प्रतिशत विश्वसनीयता के साथ संचालन कर लोगों को हर मौसम में सुरक्षित और सुगम विकल्प उपलब्ध कराया है।
इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त करते हुए वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक, जम्मू उचित सिंगल ने कहा कि 2 मई 2026 को सेवा आरंभ होने से आज 23 मई 2026 तक, मात्र 22 दिनों में एक लाख एक हजार पचास से अधिक यात्रियों का सफर उत्तर रेलवे के लिए अत्यंत गौरव का क्षण है। यह केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि जम्मू-कश्मीर के लोगों को विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचा देने की हमारी प्रतिबद्धता का जीवंत प्रमाण है।
यात्रियों से ट्रेन के आराम, सुरक्षा और आतिथ्य सत्कार को लेकर अत्यंत सकारात्मक प्रतिक्रियाएं मिली हैं। इस ट्रेन ने जम्मू-श्रीनगर मार्ग की पारंपरिक थकान को समाप्त कर दिया है। हमारा पूरा ध्यान समयपालन, बेदाग साफ-सफाई और सुरक्षा के उच्चतम मानकों को बनाए रखने पर है। हम इस सेवा को रिकॉर्ड समय में सफल बनाने के लिए सभी यात्रियों का हृदय से आभार व्यक्त करते हैं। यह गौरवशाली उपलब्धि कश्मीर घाटी को शेष भारत से बारहमासी ऑल-वेदर रेलवे लिंक से जोड़ने के सपने को साकार करती है। इससे न केवल स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा मिला है, बल्कि घाटी के सेब और हस्तशिल्प व्यवसायों को भी देश के बड़े बाजारों तक त्वरित पहुंच मिली है।
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