पर्यटकों को लगा झटका! J&K के फेमस टूरिस्ट स्पॉट्स पर ये Activities पूरी तरह बंद

Edited By VANSH Sharma, Updated: 06 Jan, 2026 04:50 PM

these activities are completely banned at famous tourist spots in j k

यह फैसला इलाके में बढ़ी सुरक्षा सतर्कता और चल रहे आतंकी-रोधी अभियानों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।

जम्मू-कश्मीर डेस्क: जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से पिर पंजाल पर्वत श्रृंखला के कुछ संवेदनशील इलाकों में ट्रेकिंग, कैंपिंग और अन्य बाहरी गतिविधियों पर अगले दो महीनों के लिए रोक लगा दी है। यह फैसला इलाके में बढ़ी सुरक्षा सतर्कता और चल रहे आतंकी-रोधी अभियानों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।

प्रशासन का कहना है कि इन क्षेत्रों में बाहरी गतिविधियां सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती हैं। सुरक्षा एजेंसियों से मिले इनपुट के आधार पर यह कदम उठाया गया है, ताकि किसी भी तरह की अनहोनी से बचा जा सके। इससे पहले उत्तर कश्मीर में गुलमर्ग के पास टंगमर्ग क्षेत्र के दनवास जंगलों में भी ट्रेकिंग पर प्रतिबंध लगाया जा चुका है। इन फैसलों को जम्मू-कश्मीर के जंगलों और पहाड़ी इलाकों में बढ़ी सुरक्षा चौकसी के रूप में देखा जा रहा है।

जानकारी के अनुसार, ट्रेकिंग, हाइकिंग और कैंपिंग जैसी गतिविधियों से सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। सूत्रों के मुताबिक, यह रोक पिर पंजाल रेंज के दोनों ओर सेना द्वारा चलाए जा रहे बड़े आतंकी-रोधी अभियानों से जुड़ी हुई है। यह पर्वत श्रृंखला कश्मीर घाटी को पुंछ, राजौरी, किश्तवाड़ और डोडा जिलों से जोड़ती है।

कोकरनाग के उप-मंडलीय मजिस्ट्रेट प्रिंस कुमार ने मार्गन टॉप, चूहरनाग और सिंथन टॉप में सभी बाहरी गतिविधियों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने के आदेश जारी किए हैं। प्रशासन के अनुसार, पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने इन ऊंचाई वाले और घने जंगलों से घिरे इलाकों में सुरक्षा खतरे की आशंका जताई है।

करीब 12 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित मार्गन टॉप और सिंथन टॉप पहले भी आतंकी गतिविधियों से जुड़े रहे हैं और ये कश्मीर को किश्तवाड़ से जोड़ने वाले अहम मार्ग हैं। वहीं, ट्रेकर्स के बीच लोकप्रिय चूहरनाग झीलों का क्षेत्र भी अपनी संवेदनशील स्थिति के कारण प्रतिबंधित किया गया है।

इस रोक का मकसद आम नागरिकों को किसी भी तरह के नुकसान से बचाना और सुरक्षा अभियानों को सुचारू रूप से चलाना है। सर्दियों में कई पारंपरिक रास्ते बंद हो जाते हैं, जिस कारण सुरक्षा बल जंगलों में तलाशी अभियान तेज करते हैं। ऐसे में ट्रेकिंग पर अस्थायी रोक को एहतियाती कदम बताया गया है।

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