Edited By VANSH Sharma, Updated: 14 Feb, 2026 04:56 PM

दोनों दोषियों को प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) से जुड़े आतंकियों को पनाह देने और अन्य प्रकार की सहायता करने का दोषी पाया गया।
जम्मू-कश्मीर डेस्क: नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) की विशेष अदालत ने जम्मू-कश्मीर में घुसे पाकिस्तानी आतंकियों की मदद करने के मामले में दो लोगों को 15-15 साल की सजा सुनाई है। दोनों दोषियों को प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) से जुड़े आतंकियों को पनाह देने और अन्य प्रकार की सहायता करने का दोषी पाया गया।
दोषियों की पहचान जाहूर अहमद पीर और नजीर अहमद पीर के रूप में हुई है। दोनों कुपवाड़ा जिले के हंदवाड़ा इलाके के निवासी हैं। जांच में सामने आया कि वर्ष 2016 में कश्मीर घाटी में घुसे एक भारी हथियारों से लैस पाकिस्तानी आतंकी को उन्होंने रहने की जगह, खाना और अन्य जरूरी मदद उपलब्ध कराई थी।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि दोनों आरोपियों ने आतंकी की आवाजाही और गतिविधियों में अहम भूमिका निभाई। कोर्ट ने उन्हें गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) की धारा 18, 19 और 39 के तहत दोषी ठहराया। दोनों को अधिकतम 15-15 साल की सजा सुनाई गई है, जो साथ-साथ चलेगी। इसके अलावा प्रत्येक दोषी पर 1.5 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
यह मामला पाकिस्तानी नागरिक बहादुर अली उर्फ सैफुल्लाह से जुड़ी बड़ी साजिश का हिस्सा बताया गया है। वह अन्य आतंकियों के साथ कुपवाड़ा में घुसपैठ कर भारत में हमले की योजना बना रहा था। सुरक्षा बलों ने जुलाई 2016 में बहादुर अली को गिरफ्तार कर लिया था, जबकि उसके दो साथी मुठभेड़ में मारे गए थे।
आगे की जांच में NIA को जाहूर और नजीर की भूमिका का पता चला, जिसके बाद उन्हें सितंबर 2017 में गिरफ्तार किया गया। मार्च 2018 में चार्जशीट दाखिल हुई। दिसंबर 2025 में अदालत ने दोनों को दोषी करार दिया और अब सजा सुनाई गई है। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, इस फैसले को कश्मीर घाटी में आतंकियों की मदद करने वाले नेटवर्क पर बड़ा झटका माना जा रहा है।
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