Edited By Sunita sarangal, Updated: 21 Oct, 2026 04:32 PM

श्रीनगर में एक कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बातचीत करते हुए राम लाल ने कहा कि आतंकवाद और हिंसा ने कश्मीर की सदियों पुरानी मिल-जुलकर रहने की परंपरा को प्रभावित किया है...
श्रीनगर(मीर आफताब): अखिल भारतीय संपर्क प्रमुख और RSS नेता राम लाल ने बुधवार को कहा कि कश्मीर के लोगों को यह समझ आ गया है कि आतंकवाद और हिंसा से न तो शांति आती है और न ही विकास। उन्होंने लोगों से शांति और आपसी भाईचारे के रास्ते पर आगे बढ़ने की अपील की।
श्रीनगर में एक कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बातचीत करते हुए राम लाल ने कहा कि आतंकवाद और हिंसा ने कश्मीर की सदियों पुरानी मिल-जुलकर रहने की परंपरा को प्रभावित किया है, लेकिन उन्होंने इस बात पर संतोष जताया कि अब लोग इसके नतीजों को समझने लगे हैं। उन्होंने कहा कि कश्मीर की संस्कृति बहुत प्राचीन है। यहां सब लोग मिल-जुलकर रहते थे। यहां सनातनी संतों और सूफी संतों की पुरानी परंपरा रही है।
उन्होंने लोगों से बाहरी ताकतों के बहकावे में न आने की अपील करते हुए कहा कि कश्मीर के सभी लोगों को इसी रास्ते पर चलना चाहिए और पूरे भारत को राह दिखानी चाहिए। उन्होंने जाति, धर्म और भाषा से ऊपर उठकर लोगों के बीच एकता का आह्वान करते हुए कहा कि हमें सभी को अपनाना चाहिए, सबका सम्मान करना चाहिए और सबको साथ लेकर चलना चाहिए। यही तो भारत है।
दुनिया भर में भारत के बढ़ते प्रभाव पर RSS नेता ने कहा कि हो सकता है कि कुछ वैश्विक शक्तियां अपना दबदबा बनाए रखना चाहती हों, लेकिन भारत की तरक्की वैश्विक शांति में योगदान दे सकती है।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी के उस आरोप पर, जिसमें उन्होंने कहा था कि RSS महिलाओं को अपने अधीन मानता है और उन्हें समान अधिकार नहीं देता, राम लाल ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इन्हें "झूठ" करार दिया। उन्होंने कहा कि वह राजनीतिक मुद्दों पर कोई टिप्पणी नहीं करते। वह राजनीतिक नेताओं पर भी कुछ नहीं कहते। लेकिन कई सालों से संघ के बारे में बहुत सारे झूठ फैलाए जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि संगठन में महिलाएं अलग-अलग भूमिकाएं निभा रही हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि लोगों का समर्थन झूठे दावों से नहीं, बल्कि सच्चाई से मिलता है। उन्होंने आलोचकों को RSS में आकर इसके कामकाज को समझने का न्योता भी दिया।
दिल्ली की ऐतिहासिक 'रेस कोर्स मस्जिद' को दिए गए बेदखली नोटिस पर उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों को धार्मिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए और सरकारों के बीच बातचीत होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि उनका मुख्यालय मुंबई में है, इसलिए उन्हें सारी जानकारी नहीं है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि सरकारों को ऐसे मामलों पर सावधानी से चर्चा करनी चाहिए ताकि टकराव से बचा जा सके।
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