Edited By Sunita sarangal, Updated: 16 Jun, 2026 11:45 AM

इन सुपरफ़ास्ट बसों में कई तो सड़कों पर दौड़ने के लिए फिट भी नहीं हैं लेकिन बावजूद इसके रोज हजारों यात्रियों की जिंदगी को दांव पर लगाया जाता है।
कठुआ(महाजन): जम्मू-कठुआ रूट पर सुपरफास्ट बसें मानों मौत बन कर दौड़ रही हैं और प्रशासन व ट्रैफिक विभाग मूक दर्शक बन कर देख रहा है। इसके चलते आए दिन न केवल सड़क हादसे होते हैं बल्कि कई लोग अकाल ही काल का ग्रास बन गए हैं।
इन सुपरफ़ास्ट बसों में कई तो सड़कों पर दौड़ने के लिए फिट भी नहीं हैं लेकिन बावजूद इसके रोज हजारों यात्रियों की जिंदगी को दांव पर लगाया जाता है। राजमार्ग तथा शहर के बीचों-बीच दौड़ लगाते हुए तथा एक दूसरे से आगे निकलने की होड़ में कई दफा एक्सीडेंट को न्यौता दे दिया जाता है।

गत दिन भी जब कठुआ से बस नम्बर (जे.के.-19, 1431) ने अपना सफर शुरू किया तो ए.बी.एस. में एक-दो सवारियां ही थी, लेकिन बरनोटी तक पहुंचते-पहुंचते जितनी सवारियां बैठी थीं, उससे ज्यादा सवारियां बस में खड़ी थीं। इसके अलावा बस के केबिन में भी पैर रखने तक की जगह नहीं थी। बावजूद इसके बस कंडक्टर ने हर अड्डे पर बस रोककर और ज्यादा सवारियां चढ़ाने से बिल्कुल भी परहेज नहीं किया, यहां तक कि 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से भागती हुई बस की खुली खिड़की पर भी यात्री टंगे हुए थे।

कब तक बस ऑप्रेटर यात्रियों की सुरक्षा से करते रहेंगे खिलवाड़
जब इस बस के नम्बर की फोटो खिंची गई तो देखने को मिला कि यह बस पहले से दुर्घटनाग्रस्त थी और इसका फ्रंट बम्पर रस्सी से किसी तरह बांध कर रुकाया गया था। ऐसे में सवाल यह है कि आखिर कब तक बस ऑप्रेटर यात्रियों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करते रहेंगे तथा पहले से दुर्घटनाग्रस्त बसें मौत बनकर सड़कों पर अनुमति से अधिक सवारियां भर कर भागती रहेंगी।
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