Edited By Neetu Bala, Updated: 05 Jan, 2026 02:00 PM
पिछले साल 10 नवम्बर को हुए धमाके से जुड़े ‘सफेदपोश' आतंकी मॉड्यूल की जांच में पता चला है कि उच्च शिक्षा प्राप्त चिकित्सकों ने पाकिस्तानी आकाओं से बात करने के लिए ‘घोस्ट' सिम कार्ड और एन्क्रिप्टेड ऐप का जटिल नैटवर्क इस्तेमाल किया।
श्रीनगर (प.स.): दिल्ली के लाल किले के पास पिछले साल 10 नवम्बर को हुए धमाके से जुड़े ‘सफेदपोश' आतंकी मॉड्यूल की जांच में पता चला है कि उच्च शिक्षा प्राप्त चिकित्सकों ने पाकिस्तानी आकाओं से बात करने के लिए ‘घोस्ट' सिम कार्ड और एन्क्रिप्टेड ऐप का जटिल नैटवर्क इस्तेमाल किया। अधिकारियों ने रविवार को यह दावा किया। जांच के नतीजों के आधार पर ही परोक्ष तौर पर दूरसंचार विभाग (डी.ओ.टी.) ने पिछले वर्ष 28 नवम्बर को एक व्यापक निर्देश जारी किया था। इस निर्देश के तहत व्हाट्सऐप, टैलीग्राम और सिग्नल जैसी ऐप-आधारित संचार सेवाओं को अनिवार्य रूप से उपकरण में मौजूद सक्रिय और भौतिक सिम कार्ड से लगातार जुड़े रहना होगा।
अधिकारियों ने बताया कि ‘सफेदपोश' आतंकी मॉड्यूल और धमाके की जांच में यह सामने आया कि गिरफ्तार चिकित्सकों मुजम्मिल गनई, अदील राथर और अन्य ने सुरक्षा एजैंसियों से बचने के लिए एक रणनीतिक ‘डुअल-फोन' प्रोटोकॉल के तहत ‘घोस्ट' सिम कार्ड का इस्तेमाल किया।
क्या है ‘घोस्ट सिम कार्ड’
‘घोस्ट सिम कार्ड' ऐसा सिम कार्ड होता है, जो किसी वास्तविक और सत्यापित पहचान से जुड़ा नहीं होता। इसका इस्तेमाल लोग अपनी पहचान छिपाने के लिए करते हैं।
'उकासा', 'फैजान' और 'हाशमी' कोडनाम से पाकिस्तान में बैठे आकाओं से करते थे बात
प्रत्येक आरोपी के पास थे 2 से 3 मोबाइल हैंडसैट
उन्होंने बताया कि लाल किले के पास विस्फोटकों से लदा वाहन चलाते समय हुए धमाके में मारे गए डॉ. उमर-उन-नबी सहित प्रत्येक आरोपी के पास दो से तीन मोबाइल हैंडसैट थे। आरोपियों के पास संदेह से बचने के लिए अलग-अलग फोन थे। इनमें से एक उनके नाम से पंजीकृत होता था, जिसका इस्तेमाल वे नियमित व्यक्तिगत और व्यावसायिक गतिविधियों के लिए करते थे, जबकि दूसरे फोन का उपयोग आतंकी गतिविधियों में करते थे। वे दूसरे फोन का इस्तेमाल पाकिस्तान में अपने आकाओं (जिन्हें 'उकासा', 'फैजान' और 'हाशमी' कोडनाम से पहचाना जाता था) से व्हाट्सऐप और टैलीग्राम के माध्यम से बातचीत करने में करते थे। अधिकारियों ने बताया कि दूसरे फोन के लिए जारी किए गए सिम कार्ड गैर-संदिग्ध नागरिकों के नाम पर थे, जिनके आधार कार्ड की जानकारी का दुरुपयोग किया गया था।
फर्जी आधार कार्ड का उपयोग करके जारी किए जा रहे थे सिम
उन्होंने बताया कि जम्मू -कश्मीर पुलिस ने एक अलग रैकेट का भी पर्दाफाश किया है, जिसमें फर्जी आधार कार्ड का उपयोग करके सिम जारी किए जा रहे थे।
अधिकारियों के अनुसार सुरक्षा एजैंसियों ने एक चिंताजनक प्रवृत्ति का पता लगाया, जिसमें ये सिम कार्ड सीमापार पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पी.ओ.के.) या पाकिस्तान में मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर सक्रिय थे। उपकरण में भौतिक सिम के बिना मैसेजिंग ऐप चलाने की सुविधा का फायदा उठाकर पाकिस्तानी आका मॉड्यूल को यूट्यूब के माध्यम से आई.ई.डी. तैयार करना सीखने और "भीतरी इलाकों" में हमले की योजना बनाने के लिए निर्देशित करने में सक्षम थे। हालांकि, भर्ती किए गए ऐसे लोग शुरू में सीरिया या अफगानिस्तान में संघर्ष क्षेत्रों में शामिल होना चाहते थे।
सुरक्षा खामियों को दूर करने के लिए केंद्र ने दूरसंचार साइबर सुरक्षा नियमों को किया लागू
सुरक्षा खामियों को दूर करने के लिए केंद्र ने दूरसंचार अधिनियम, 2023 और दूरसंचार साइबर सुरक्षा नियमों को लागू किया है ताकि "दूरसंचार परिवेशी तंत्र की शुचिता की रक्षा की जा सके।" इसमें एक नियम यह भी शामिल है कि 90 दिनों के भीतर, सभी ‘टैलीक्म्युनिकेशन आइडैंटिफायर यूजर इंटिटीज' (टी.आई.यू.ई.) को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके ऐप तभी काम करें, जब उपकरण में एक सक्रिय सिम लगा हो।
अधिकारियों ने बताया कि आदेश में दूरसंचार ऑप्रेटर को सक्रिय सिम नहीं होने की स्थिति में व्हाट्सऐप, टैलीग्राम और सिग्नल जैसे ऐप से उपयोगकर्त्ताओं को स्वचालित रूप से लॉग आऊट करने का निर्देश दिया गया है।
उन्होंने कहा कि साथ ही यह भी कहा गया है कि स्नैपचैट, शेयरचैट और जियोचैट सहित सभी सेवा प्रदाताओं को दूरसंचार विभाग को अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। दूरसंचार विभाग ने इस कदम के पीछे के कारणों को समझाते हुए एक बयान में कहा कि सिम के बिना ऐप का उपयोग करने की यह सुविधा दूरसंचार साइबर सुरक्षा के लिए एक चुनौती बन रही है, क्योंकि इसका दुरुपयोग देश के बाहर से साइबर धोखाधड़ी और आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए किया जा रहा है। जम्मू-कश्मीर दूरसंचार सर्कल में इस निर्देश को तेजी से लागू किया जा रहा है।
हालांकि, अधिकारी मानते हैं कि सभी एक्सपायर या फर्जी सिम को निष्क्रिय करने में समय लगेगा, लेकिन इस कदम को आतंकी नैटवर्क द्वारा "सफेदपोश" ऑप्रेटिप को कट्टरपंथी बनाने और नियंत्रित करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले डिजिटल बुनियादी ढांचे पर एक गंभीर प्रहार के रूप में देखा जा रहा है। अधिकारियों ने कहा कि इन मानदंडों का पालन नहीं करने पर दूरसंचार साइबर सुरक्षा नियमों और अन्य लागू कानूनों के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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