Kishtwar Encounter: सेना के ऑपरेशन का हीरो 'Tyson', गोली लगने के बाद भी जंगल में छिपे आतंकियों का ऐसे किया पर्दाफाश

Edited By Neetu Bala, Updated: 23 Feb, 2026 04:40 PM

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किश्तवाड़ के छात्रु इलाके में सेना ने ऑपरेशन के दौरान जैश के 3 आतंकियों को ढेर कर दिया और साथ में हथियार और गोला बारूद भी बरामद किए।

जम्मू :   किश्तवाड़ के छात्रु इलाके में सेना ने ऑपरेशन के दौरान जैश के 3 आतंकियों को ढेर कर दिया और साथ में हथियार और गोला बारूद भी बरामद किए। किश्तवाड़ के जंगलों में सेना के सफल अभियान का हीरो स्पैशल साइलैंट वॉरियर टाइसन छिपे हुए 3 आतंकवादियों तक पहुंच गया था। इस दौरान के-9 ट्रूपर टाइसन आतंकियों द्वारा गोली मारने से घायल हो गया। टाइसन ने आतंकियों की लोकेशन अपने साथियों को बताकर जिम्मेदारी निभाई।

कौन हैं टाइसन

आतंकियों को मार गिराने के अभियान दौरान 11 बजे के करीब सेना की 2 पैरा स्पैशल फोर्स का एलीट जर्मन शैफर्ड, आर्मी डॉग टाइसन उस ढोक (छिपने के ठिकाने) तक पहुंच गया था जहां आतंकी छिपे हुए थे। टाइसन के पीछे उसके हैंडलर थे।

टाइसन के पैर में लगी गोली

आतंकवादियों द्वारा दागी गई गोलियों में से एक गोली टाइसन के अगले दाएं पैर में लगी। घायल टाइसन को सैनिकों द्वारा वहां से निकालने के साथ ही घेरे गए आतंकियों को मार गिराने का अभियान जोर पकड़ गया था। टाइसन अगर आतंकियों को न तलाशता तो वे छिपकर सैनिकों को नुकसान भी पहुंचा सकते थे।

घायल टाइसन को हैलीकॉप्टर से पहुंचाया अस्पताल

गोली लगने से घायल टाइसन को सेना द्वारा हैलीकॉप्टर से एयरलिफ्ट कर ऊधमपुर के आर्मी अस्पताल ले जाया गया। वहां उसकी स्थिति सामान्य बनी हुई है। सैन्य सूत्रों के अनुसार टाइसन क्षेत्र में आतंक विरोधी अभियान में अहम भूमिका निभा रहा था।

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आदिल को मारने में की मदद

तलाशी अभियानों के दौरान आतंकियों के छिपने के ठिकाने को तलाशने, विस्फोटक सामग्री का पता लगाने में दक्ष टाइसन ने कुछ दिन पहले क्षेत्र में जैश के आतंकी आदिल को मारने में सैनिकों की मदद की थी। उसने सुरक्षाबलों के साथ सबसे आगे रह कर आतंकी आदिल के हाइडआऊट का पता लगाकर उसे उसके अंजाम तक पहुंचाया था।

जम्मू-कश्मीर में भारतीय सेना के के-9 दस्ते के आर्मी डॉग आतंकियों के मंसूबों को नाकाम बनाने में अहम योगदान दे रहे हैं। कई बार आतंकियों द्वारा फिट आई.डी. को समय पर तलाश कर के-9 दस्ते ने बड़े हादसे टाले हैं। टाइसन जैसे आर्मी डॉग को बेहद कठोर ट्रेनिंग दी जाती है।

वे अत्यधिक जोखिम वाली परिस्थितियों में सैनिकों की जान बचाने के लिए बिना किसी डर के मौत के मुंह में भी कूद जाते हैं। वर्ष 2024 में 4 साल का बैल्जियन मेलिनासय आर्मी डॉग फैंटम जम्मू के अखनूर सैक्टर में आतंकवादियों से लोहा लेते हुए बलिदान हो गया था। उसने जान देने से पहले सैनिकों को वह जगह दिखा दी थी यहां पर आतंकी छिपे हुए थे। आर्मी डॉग फैंटम के बलिदान की बदौलत सेना के जवानों ने छिपे 3 आतंकवादियों को मार गिराया था।

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