Edited By Neetu Bala, Updated: 03 Apr, 2026 07:46 PM
ये बदलाव देश की स्कूली शिक्षा व्यवस्था में एक बड़ा परिवर्तन माने जा रहे हैं, जिनका उद्देश्य छात्रों को बहुभाषी बनाने के साथ-साथ उन्हें बुनियादी से लेकर उन्नत स्तर तक बेहतर शिक्षा के अवसर प्रदान करना है।
जम्मू (विक्की) : जम्मू-कश्मीर के केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ( Central Board of Secondary Education) से संबद्ध स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों को वर्ष 2026–27 के शैक्षणिक सत्र से बड़े शैक्षणिक बदलावों के अनुरूप खुद को ढालना होगा। बोर्ड द्वारा लागू किया जा रहा नया पाठ्यक्रम राष्ट्रीय शिक्षा नीति और नई राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा की सिफारिशों पर आधारित है।
इस नए प्रावधान के तहत कक्षा 6 से तीन-भाषा व्यवस्था चरणबद्ध तरीके से लागू की जाएगी, जबकि कक्षा 9 से गणित और विज्ञान विषयों में दो-स्तरीय प्रणाली शुरू की जाएगी।
नए दिशा-निर्देशों के अनुसार कक्षा 6 से 10 तक के सभी छात्रों के लिए 3 भाषाओं का अध्ययन अनिवार्य होगा, जिनमें से कम से कम 2 भारतीय भाषाएं होंगी। भाषा व्यवस्था को आर-1, आर-2 और आर-3 श्रेणियों में विभाजित किया गया है। इसका उद्देश्य छात्रों में बहुभाषी दक्षता विकसित करना और उनकी सांस्कृतिक व भाषाई समझ को मजबूत करना है।
इस बदलाव का असर जम्मू-कश्मीर के स्कूलों पर भी पड़ेगा, जहां अब तक अधिकांश संस्थानों में अंग्रेजी और हिंदी पर अधिक जोर दिया जाता रहा है, जबकि क्षेत्रीय भाषाओं को अपेक्षाकृत कम महत्व मिला है। अब नई व्यवस्था के तहत इन भाषाओं को भी अधिक प्रोत्साहन मिलने की संभावना है।
अधिकारियों के अनुसार वर्ष 2026–27 से कक्षा 6 में तीसरी भाषा को अनिवार्य किया जाएगा, ताकि प्रत्येक छात्र कम से कम दो भारतीय भाषाओं का अध्ययन कर सके। हालांकि, विशेष परिस्थितियों जैसे विदेश से लौटने वाले छात्रों में तीसरी भाषा से छूट दी जा सकती है, बशर्ते वे निर्धारित विषयों की कुल संख्या पूरी करें।
गणित और विज्ञान विषयों में भी महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। कक्षा 9 से सभी छात्रों को 80 अंकों की मानक परीक्षा देनी होगी, जिसकी अवधि 3 घंटे होगी। इसके अतिरिक्त जो छात्र विषय की गहराई से पढ़ाई करना चाहते हैं, वे उच्च स्तर का विकल्प चुन सकेंगे।
उच्च स्तर के अंतर्गत 25 अंकों की एक अलग एक घंटे की परीक्षा होगी, जिसका उद्देश्य छात्रों की अवधारणात्मक समझ और विश्लेषण क्षमता का आकलन करना है। यह परीक्षा वैकल्पिक होगी और छात्र गणित, विज्ञान या दोनों विषयों में से किसी एक या दोनों में इसे चुन सकते हैं।
बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि उच्च स्तर की परीक्षा के अंक कुल परिणाम में नहीं जोड़े जाएंगे। हालांकि, जो छात्र इसमें 50 प्रतिशत या उससे अधिक अंक प्राप्त करेंगे, उनकी उपलब्धि को अंकतालिका में अलग से दर्शाया जाएगा।
यह नई दो-स्तरीय प्रणाली वर्ष 2026–27 से कक्षा 9 में लागू होगी और इसके तहत पढ़ने वाले छात्रों का पहला कक्षा 10 बोर्ड परीक्षा बैच वर्ष 2028 में शामिल होगा।
शिक्षा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि यह सुधार छात्रों को उनकी रुचि और क्षमता के अनुसार पढ़ाई का विकल्प देगा और विषयों की गहराई से समझ विकसित करने में मदद करेगा। हालांकि, स्कूलों के सामने योग्य शिक्षकों की व्यवस्था, संसाधनों की उपलब्धता और छात्रों को नए ढांचे के अनुरूप तैयार करने जैसी चुनौतियां भी सामने आ सकती हैं।
कुल मिलाकर, ये बदलाव देश की स्कूली शिक्षा व्यवस्था में एक बड़ा परिवर्तन माने जा रहे हैं, जिनका उद्देश्य छात्रों को बहुभाषी बनाने के साथ-साथ उन्हें बुनियादी से लेकर उन्नत स्तर तक बेहतर शिक्षा के अवसर प्रदान करना है।
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