Edited By Neetu Bala, Updated: 11 Apr, 2026 01:49 PM

जम्मू-कश्मीर के नागरिकों को चिकित्सा सुविधा मुहैया करवाने को लेकर स्वास्थ्य और उससे जुड़े सहयोगी विभाग कितने गंभीर हैं उसका खुलासा महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में किया गया है।
जम्मू (उदय) : जम्मू-कश्मीर के नागरिकों को चिकित्सा सुविधा मुहैया करवाने को लेकर स्वास्थ्य और उससे जुड़े सहयोगी विभाग कितने गंभीर हैं उसका खुलासा महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में किया गया है। बीमार नागरिकों को बेहतर सुविधा मुहैया करवाने के नाम पर करोड़ों रुपए के उपकरण खरीदे गए जिनका इस्तेमाल नहीं हुआ या फिर पड़े-पड़े एक्सपायर हो गए। कई उपकरण बिना उपयोग के ही अस्पतालों में धूल फांक रहे हैं।
जम्मू के SMGS अस्पताल के लिए मार्च, 2022 तक की अवधि में 10 उपकरण लगभग 82 लाख रुपए की लागत से खरीदे गए जिसमें इंकुबेटर, पल्स ऑक्सीमीटर, रेडिएंट वार्मर, वाल मॉनिटर, इंफ्यूजन पम्प, सी.पैप, फोटो थैरेपी मशीन, डेफीब्रिलेटर, पेशेंट मॉनिटर एवं सी.टी.जी. मशीन शामिल हैं और इनकी वारंटी 2017 से 2021 तक थी परन्तु इनका इस्तेमाल नहीं किया गया जबकि करोड़ों रुपए की यह खरीद बेकार साबित हुई।
इसी तरह वर्ल्ड बैंक की सहायता से जेहलम तवी फ्लड रिकवरी प्रोजैक्ट के अंतर्गत जम्मू-कश्मीर मैडीकल सप्लाई कार्पोरेशन लिमिटेड ने सप्लायर/निर्माताओं के साथ समझौता किया जिसमें 289.69 करोड़ रुपए की वस्तुएं सप्लाई की जानी थीं। कैग. ने बताया कि रिकार्ड के अनुसार 5,868 वस्तुओं में से 68 वस्तुएं जिनकी कीमत 10.22 करोड़ रुपए आंकी गई, मार्च 2022 तक नहीं प्राप्त हुईं और जो 3150 वस्तुएं जिनकी कीमत लगभग 123.41 करोड़ आंकी गई, भी 306 दिन या उससे अधिक समय के बाद प्राप्त हुईं। हालांकि वित्त सलाहकार/सी.ए.ओ. जे.के.एम.एस.सी.एल. ने जनवरी, 2025 में बताया कि 290 करोड़ में से 100 प्रतिशत सप्लाई हो चुकी है।
यही नहीं वर्ल्ड बैंक की सहायता से 24 मशीनें जिनकी लागत लगभग 1.61 करोड़ रुपए थी और उन्हें ट्रामा केयर सैंटर ऊधमपुर के लिए खरीदा गया, उसका इस्तेमाल नहीं किया गया और अभी भी 1.61 करोड़ की लागत से वे मशीनें धूल फांक रही हैं क्योंकि इनके संचालन के लिए स्टाफ उपलब्ध नहीं था। ऊधमपुर अस्पताल के मैडीकल सुपरिंटैंडैंट ने बताया कि ट्रामा केयर सैंटर का संचालन न होने के पीछे स्टाफ और जगह की कमी बताई। अगर स्टाफ या जगह उपलब्ध नहीं थी तो फिर ऐसी खरीद निश्चित रूप से सवालों के घेरे में है।
ऐसा ही मामला जिला अस्पताल Ramban का है जहां 30.68 लाख के लैप्रोस्कोपी के उपकरण निदेशक स्वास्थ्य सेवा जम्मू की ओर से प्रदान किए गए जिसमें कुछ अन्य उपकरण जोड़ने पर इसकी कीमत लगभग 1.08 करोड़ पहुंच गई। आडिट में उजागर हुआ कि जिला अस्पताल रामबन ने ऐसी किसी जरूरत की इच्छा ही नहीं जताई थी।
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