Edited By Sunita sarangal, Updated: 08 Jun, 2026 12:20 PM

जानकारी के अनुसार, गांव के लोगों ने उस समय इस मामले का खुलासा किया जब उन्होंने पेयजल स्रोत से पानी कम आने के बाद निरीक्षण किया
राजौरी(शिवम): राजौरी जिले की कोटरंका तहसील के धार सकरी पंचायत के वार्ड नंबर 5 द्रेरी मोहल्ला में स्थित पेयजल स्रोत में कथित तौर पर घोड़े की खोपड़ी मिलने का मामला सामने आने के बाद क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। घटना को लेकर स्थानीय लोगों में भारी रोष व्याप्त है और उन्होंने मामले की गहन जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
जानकारी के अनुसार, गांव के लोगों ने उस समय इस मामले का खुलासा किया जब उन्होंने पेयजल स्रोत से पानी कम आने के बाद निरीक्षण किया और उसी दौरान जलस्रोत के भीतर घोड़े की खोपड़ी जैसी वस्तु देखी। ग्रामीणों का कहना है कि इसी प्राकृतिक जलस्रोत से क्षेत्र के कई परिवारों को पेयजल उपलब्ध कराया जाता है और लोग पिछले कई दिनों से इसी पानी का उपयोग कर रहे थे। घटना की जानकारी मिलते ही लोगों में चिंता और नाराजगी फैल गई।
स्थानीय निवासियों ने आशंका जताई है कि यह किसी की शरारत या सुनियोजित साजिश का परिणाम हो सकता है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि किसी ने जानबूझकर पेयजल स्रोत को दूषित करने का प्रयास किया है तो यह बेहद गंभीर मामला है और इसके लिए जिम्मेदार लोगों को कानून के दायरे में लाया जाना चाहिए।
मामले की गंभीरता को देखते हुए बुद्धल के विधायक जावेद इकबाल चौधरी ने भी कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि धार पंचायत के जल स्रोत (स्प्रिंग वाटर) में घोड़े की खोपड़ी मिलने के मामले को अत्यंत गंभीरता से लिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि घटना की जांच के लिए पुलिस और सिविल प्रशासन दोनों ने कार्रवाई शुरू कर दी है और मामले के सभी पहलुओं की बारीकी से जांच की जा रही है।
विधायक जावेद इकबाल चौधरी ने कहा कि यदि जांच में किसी प्रकार की शरारत, दुर्भावनापूर्ण हरकत या साजिश सामने आती है तो उसकी निष्पक्ष और व्यापक जांच सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जो भी व्यक्ति इस घटना में संलिप्त पाया जाएगा, उसे किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा और कानून के अनुसार उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
इस बीच ग्रामीणों ने जल शक्ति विभाग (पी.एच.ई.) से जलस्रोत की तत्काल सफाई, पानी की गुणवत्ता की वैज्ञानिक जांच तथा लोगों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक संबंधित स्रोत के पानी की गुणवत्ता की पुष्टि की जानी चाहिए ताकि किसी भी स्वास्थ्य संबंधी खतरे से बचा जा सके।
घटना के बाद प्रशासनिक और विभागीय अधिकारियों ने भी मामले का संज्ञान लिया है। पुलिस, सिविल प्रशासन और संबंधित विभाग संयुक्त रूप से पूरे मामले की जांच में जुटे हुए हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद तथ्य सार्वजनिक किए जाएंगे और यदि किसी की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। फिलहाल पूरे क्षेत्र की निगाहें जांच के पर टिकी हुई हैं और ग्रामीण प्रशासन से शीघ्र कार्रवाई की उम्मीद कर रहे हैं।
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