45 करोड़ खर्च, 2.5 साल से तैयार पुल फिर भी बंद! PWD पर उठे सवाल

Edited By Sunita sarangal, Updated: 01 Sep, 2026 05:49 PM

bridge dispute in kathua

इसे विडंबना ही कहा जाएगा कि दो साल से उझ दरिया पर करीब 45 करोड़ की लागत से बन कर तैयार जुथाना पुल को आज तक फाइनल टच नहीं दिया गया है

बनी/कठुआ(राकेश): इसे विडंबना ही कहा जाएगा कि दो साल से उझ दरिया पर करीब 45 करोड़ की लागत से बन कर तैयार जुथाना पुल को आज तक फाइनल टच नहीं दिया गया है और न ही अधिकारिक तौर पर इतनी रकम से बने पुल का उद्घाटन कर लोकार्पण किया गया है।

ऐसा इसलिए है कि पुल के दोनों शोर तक पक्की सड़क आज तक नहीं बनाई गई है, जुगाड़ करके जैसे-कैसे मिट्टी कंकड़ मलबा भरकर पुल के साथ कनैक्शन जोड़ने वाला काम किया गया है, ताकि गांववासी अब कम से कम पुल का काम पूरा न होने पर शोर मचाना बंद कर दें। हालांकि ऐसा कुछ दिनों या कुछ महीनों तक किया जा सकता है, लेकिन जहां पर ऐसा ढाई साल से पुल बनाकर तैयार कर दिया गया है, गांववासी भी शायद इसलिए चुप हैं या फिर उनका मुंह बंद करने वाली बात की गई है, क्योंकि पिछले 60 साल से वो खतरनाक बहते उझ दरिया को पार करते थे, वर्ष 2014 में मांग पूरी की गई, जिसका निर्माण 2017 में शुरू तो हुआ, लेकिन दो साल में तैयार होने वाले पुल को बनाने में 10 साल लगा दिए, जब बन गया तो उसका उद्घाटन अभी तक फाइनल टच न देने से लंबित है।

इस तरह की स्थिति होने से एक तो वहां की 10 हजार आबादी को पुल पर चलने की वो सुविधा नहीं मिल पा रही है, जो अन्य पुलों पर होती है। स्थानीय गांववासियों का कहना है कि कच्चा मार्ग पुल से जोड़ने के कारण बरसात में कई बार हल्के वाहन से भी आवाजाही प्रभावित हो जाती है।

पी.डब्ल्यू.डी. की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

कठुआ की सामाजिक संस्था आशा के महासचिव महेश चंद्र गुप्ता ने उक्त गांव में बने पुल का आज ढाई साल बीतने पर उद्घाटन न करने और साथ ही फाइनल टच पूरा नहीं करने पर निर्माण एजैंसी पी.डब्ल्यू.डी. की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि ये पुल जुथाना को कई गांवों जिला व देश को जोड़ता है, लेकिन अभी तक पुल पर कंकरीट की स्लैब ही है, जिसे फिनिशिंग भी नहीं दी गई है, जबकि इस पुल को तैयार होने के लिए गांववासियों ने 10 से 12 वर्ष इंतजार किया है, क्योंकि पुल निर्माण गति ही बहुत धीमी रही,जब बना तो पूर्व में हुए 2024 के संसदीय चुनाव में इसे पूरे करने के दावे किए गए, उनको भी 10 हजार आबादी वाले लोगों की तरह पुल बनने पर तब संतोष तो हुआ, लेकिन अभी तक पुल और उसके साथ जोड़ने वाली सड़क की हालत देखकर हैरानी हुई कि 60 वर्षों के बाद भी यहां के ग्रामीणों की परेशानी पुल बनने के बाद भी खत्म होती नहीं दिखी।

अभी तक नहीं बिछाई पुल पर तारकोल

सड़क और पुल की हालत देखकर लगता है कि इसे जनता के लिए खोला हीं नहीं गया है। पुल पर तारकोल भी नहीं बिछाई गई है, जंग लगी रेलिंग खुद ही अपनी कहानी बयां कर रही है, जिस पर आज तक पेंट भी नहीं किया गया है। पुल के दोनों तरफ जोड़ने वाले बिंदू बेहद खराब हालत में है, इसी कारण अभी भी जुथाना गांव के लिए कोई मेटाडोर या बस उपलब्ध नहीं है। ऐसा लगता है कि चुनाव संपन्न होने के बाद पुल पर फिर पूर्व की तरह ध्यान नहीं दिया गया है, स्थानीय गांववासी इसलिए चुप है कि उनको बरसात में अब पैदल दरिया पार नहीं करना पड़ता है। इस समस्या को सांसद, विधायक और संबंधित विभाग दौरा करें और देखे कि कैसे उन्हें और जनता को धोखा दिया गया है।

अपने शहर की खबरें Whatsapp पर पढ़ने के लिए Click Here

जम्मू-कश्मीर की खबरें Instagram पर पढ़ने के लिए हमें Join करें Click Here

Trending Topics

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!