Edited By Neetu Bala, Updated: 28 Oct, 2026 07:20 PM
इस दौरान उन्होंने चंद्र दर्शन के समय, पूजा की विधि, व्रत के नियमों तथा पहली बार करवा चौथ का व्रत रखने वाली महिलाओं के लिए आवश्यक दिशा-निर्देशों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
अखनूर ( रोहित मिश्रा ) : पति की लंबी आयु, सुखी दांपत्य जीवन और अखंड सौभाग्य की कामना का प्रतीक करवा चौथ का पावन पर्व सुहागिन महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की दीर्घायु और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हुए निर्जला व्रत रखती हैं तथा रात्रि में चंद्रमा के दर्शन और पूजा-अर्चना के बाद व्रत का पारण करती हैं।
करवा चौथ के अवसर पर पंजाब केसरी ने पंडित अशोक शर्मा शास्त्री जी से विशेष बातचीत की। इस दौरान उन्होंने चंद्र दर्शन के समय, पूजा की विधि, व्रत के नियमों तथा पहली बार करवा चौथ का व्रत रखने वाली महिलाओं के लिए आवश्यक दिशा-निर्देशों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
रात 8 बजकर 10 मिनट पर होंगे चंद्र दर्शन
पंडित अशोक शर्मा शास्त्री जी ने बताया कि 29 अक्टूबर को रात 8 बजकर 10 मिनट पर चंद्र दर्शन का समय रहेगा। उन्होंने कहा कि महिलाएं चंद्रमा के दर्शन करने के बाद परंपरानुसार अर्घ्य अर्पित करें और श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना संपन्न करें। इसके पश्चात अपने पति के हाथों जल ग्रहण कर व्रत का पारण कर सकती हैं। हालांकि, चंद्र दर्शन का वास्तविक समय स्थानीय परिस्थितियों और क्षेत्र के अनुसार कुछ अलग हो सकता है।
पहली बार व्रत रखने वाली महिलाएं किन बातों का रखें ध्यान?
शास्त्री अशोक शर्मा जी ने बताया कि जो महिलाएं पहली बार करवा चौथ का व्रत रख रही हैं, उन्हें व्रत की परंपराओं और पूजा-पद्धति की जानकारी पहले से प्राप्त कर लेनी चाहिए। व्रत के दिन प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और श्रद्धापूर्वक व्रत का संकल्प लें। परंपरा के अनुसार सरगी ग्रहण करने के बाद व्रत रखा जाता है। दिनभर पूजा-पाठ और ईश्वर का स्मरण करते हुए मन को शांत एवं सकारात्मक बनाए रखना चाहिए।
उन्होंने बताया कि करवा चौथ की पूजा के दौरान करवा माता की पूजा, करवा चौथ की कथा का श्रवण तथा चंद्रमा को अर्घ्य देने का विशेष महत्व है। महिलाएं अपनी पारिवारिक परंपरा और स्थानीय रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा संपन्न कर सकती हैं।
क्या करना चाहिए और किन बातों से बचना चाहिए?
पंडित अशोक शर्मा शास्त्री जी ने कहा कि व्रत के दौरान श्रद्धा, संयम और सकारात्मक भाव बनाए रखना चाहिए। पूजा के लिए आवश्यक सामग्री पहले से तैयार कर लेनी चाहिए, ताकि अंतिम समय में किसी प्रकार की परेशानी न हो। चंद्र दर्शन के बाद विधि-विधान से पूजा करके ही व्रत का पारण करना चाहिए।
उन्होंने यह भी सलाह दी कि व्रत रखने वाली महिलाएं अपनी सेहत का ध्यान रखें। विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं, मधुमेह से पीड़ित महिलाओं अथवा नियमित दवाइयां लेने वाली महिलाओं को निर्जला व्रत रखने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
आस्था, प्रेम और विश्वास का प्रतीक है करवा चौथ
पंडित अशोक शर्मा शास्त्री जी ने बताया कि करवा चौथ केवल उपवास का पर्व नहीं, बल्कि पति-पत्नी के बीच प्रेम, विश्वास, समर्पण और पारिवारिक एकता का प्रतीक भी है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, सुखी वैवाहिक जीवन और परिवार की खुशहाली के लिए व्रत रखती हैं। चंद्रमा को अर्घ्य देने और पूजा-अर्चना के साथ इस पर्व की परंपराएं पूरी की जाती हैं।
उन्होंने सभी महिलाओं को करवा चौथ की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि इस पावन अवसर को श्रद्धा, उल्लास और पारिवारिक प्रेम के साथ मनाएं तथा पूजा के दौरान परंपराओं के साथ-साथ अपने स्वास्थ्य का भी ध्यान रखें।
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