Rajouri-Poonch तक रेल पहुंचाने की दिशा में बड़ा कदम, 190 कि.मी. रेल लाइन के सर्वे को मंजूरी

Edited By Neetu Bala, Updated: 09 Aug, 2026 04:40 PM

train to rajouri poonch

जम्मू संभाग के सीमावर्ती एवं पहाड़ी जिलों राजौरी और पुंछ को रेल नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में केंद्र सरकार ने अहम पहल की है

राजौरी ( शिवम) : जम्मू संभाग के सीमावर्ती एवं पहाड़ी जिलों राजौरी और पुंछ को रेल नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में केंद्र सरकार ने अहम पहल की है। जम्मू से रियासी होते हुए पुंछ तक प्रस्तावित करीब 190 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन के लिए फाइनल लोकेशन सर्वे को मंजूरी दे दी गई है। सर्वे के आधार पर परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की जाएगी।

केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने राज्यसभा में भाजपा सांसद गुलाम अली खटाना के सवाल के जवाब में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण जम्मू-रियासी-पुंछ नई रेल लाइन के लिए फाइनल लोकेशन सर्वे को मंजूरी प्रदान की गई है।

एफ.एल.एस. के तहत प्रस्तावित रेल मार्ग की तकनीकी, भौगोलिक और व्यवहारिक संभावनाओं का विस्तृत अध्ययन किया जाएगा। इसमें रेल मार्ग के लिए उपयुक्त जमीन, पहाड़ी इलाकों, पुलों, सुरंगों और अन्य जरूरी तकनीकी पहलुओं का आकलन शामिल होगा। सर्वे के निष्कर्षों के आधार पर डी.पी.आर. तैयार की जाएगी।

320 से अधिक पुलों व सुरंगों का किया निर्माण

272 किलोमीटर लंबी यूएसबीआरएल परियोजना देश की सबसे चुनौतीपूर्ण रेल परियोजनाओं में शामिल रही है। हिमालयी क्षेत्र की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच तैयार इस परियोजना में रियासी जिले में चिनाब नदी पर दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे पुल बनाया गया है। इसके अलावा अंजी खड्ड पर भारतीय रेलवे का पहला केबल-स्टे पुल भी तैयार किया गया है। इस परियोजना में 320 से अधिक पुलों और सुरंगों का निर्माण किया गया है, जिससे क्षेत्र में बेहतर आवागमन की सुविधा उपलब्ध हुई है।

राजौरी-पुंछ के लिए बदल सकती हैं संपर्क व्यवस्था

रेल लाइन परियोजना को राजौरी और पुंछ के लिए महज परिवहन सुविधा के बजाय संपर्क और विकास के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वर्तमान में दोनों सीमावर्ती जिलों में रेल सुविधा नहीं है। रेल नेटवर्क से जुड़ने के बाद जम्मू और देश के अन्य हिस्सों तक आवागमन सुगम होने की उम्मीद है।

इससे विद्यार्थियों, कर्मचारियों, व्यापारियों और मरीजों को विशेष लाभ मिल सकता है। साथ ही व्यापारिक गतिविधियों, रोजगार और पर्यटन को भी गति मिलने की संभावना है। सीमावर्ती एवं दूरदराज क्षेत्रों में बेहतर परिवहन संपर्क से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

सर्वे के बाद तैयार होगी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट

फाइनल लोकेशन सर्वे की मंजूरी के बाद परियोजना को तकनीकी अध्ययन के अगले चरण में ले जाया गया है। सर्वे के दौरान प्रस्तावित रेल कॉरिडोर की भौगोलिक परिस्थितियों, भूमि संबंधी पहलुओं और निर्माण की तकनीकी जरूरतों का आकलन किया जाएगा।

विशेष रूप से पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण सुरंगों, पुलों, ढलानों और अन्य संरचनाओं से जुड़े पहलुओं का अध्ययन परियोजना की व्यवहारिकता तय करने में अहम होगा। इसके बाद तैयार होने वाली डीपीआर परियोजना की लागत, निर्माण संबंधी आवश्यकताओं और अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं का आधार बनेगी।

डी.पी.आर. के बाद शुरू होगी मंजूरियों की प्रक्रिया

रेल मंत्री ने बताया कि फाइनल लोकेशन सर्वे और डीपीआर तैयार होने के बाद परियोजना को विभिन्न स्तरों पर आवश्यक प्रक्रियाओं और अनुमोदनों से गुजरना होगा। इस दौरान जम्मू-कश्मीर सरकार सहित संबंधित हितधारकों और एजेंसियों से विचार-विमर्श किया जाएगा। इसके अलावा नीति आयोग, वित्त मंत्रालय और अन्य सक्षम संस्थानों से आवश्यक मूल्यांकन एवं मंजूरी की प्रक्रिया भी पूरी करनी होगी। रेल मंत्रालय के अनुसार संबंधित पक्षों के साथ परामर्श लगातार चलने वाली प्रक्रिया है, इसलिए परियोजना के पूरा होने की अंतिम समय सीमा फिलहाल निर्धारित नहीं की गई है।

पर्यटन और व्यापार को भी मिल सकता है फायदा

राजौरी-पुंछ तक रेल संपर्क बनने से क्षेत्र के पर्यटन को भी नई गति मिलने की संभावना है। मुगल रोड, ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थलों के साथ-साथ पहाड़ी और प्राकृतिक पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान हो सकती है।

रेल संपर्क स्थापित होने पर स्थानीय कृषि उत्पादों और अन्य सामान को जम्मू सहित देश के बड़े बाजारों तक पहुंचाने में भी सुविधा मिल सकती है। इससे क्षेत्र में व्यापारिक गतिविधियों के विस्तार और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

जम्मू-कश्मीर में रेल सुरक्षा पर भी जोर

केंद्रीय रेल मंत्रालय की ओर से जम्मू-कश्मीर में रेल सुरक्षा एवं आधुनिक सिग्नलिंग व्यवस्था को मजबूत करने के लिए भी कदम उठाए जा रहे हैं। रेल मंत्री के अनुसार जम्मू-कश्मीर से गुजरने वाले करीब 401 रूट किलोमीटर पर स्वदेशी स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली 'कवच' से संबंधित कार्यों को मंजूरी दी गई है।

हालांकि यह कार्य प्रस्तावित जम्मू-रियासी-पुंछ रेल लाइन से सीधे तौर पर जुड़ा नहीं है, लेकिन इससे जम्मू-कश्मीर में रेल नेटवर्क के विस्तार के साथ सुरक्षा और आधुनिकीकरण पर दिए जा रहे जोर का भी संकेत मिलता है।

फाइनल लोकेशन सर्वे की मंजूरी के साथ जम्मू-रियासी-पुंछ रेल परियोजना अब सर्वे और डीपीआर की तैयारी के चरण में पहुंच गई है। आगे की प्रगति तकनीकी अध्ययन, वित्तीय आकलन और विभिन्न स्तरों पर मिलने वाली मंजूरियों पर निर्भर करेगी। ऐसे में राजौरी और पुंछ के लोगों की नजर अब सर्वे के परिणाम, डीपीआर और परियोजना को मिलने वाली आगामी मंजूरियों पर रहेगी।

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