''दया नहीं, अपना अधिकार चाहिए''  दिव्यांग समाज ने उठाई मांग, पढ़ें खबर...

Edited By Neetu Bala, Updated: 21 Jun, 2026 02:21 PM

the differently abled community raises a demand

हर चुनाव में महिलाओं, युवाओं और अलग-अलग वर्गों की बात होती है, लेकिन दिव्यांग समाज को हमेशा नजरअंदाज किया जाता है।

अखनूर ( रोहित मिश्रा ) :  जम्मू-कश्मीर हो या देश का कोई भी राज्य…राज्यसभा चुनाव हो, विधानसभा चुनाव हो, लोकल बॉडी चुनाव हो या ग्राम पंचायत चुनाव — हर बार दिव्यांग समाज को सिर्फ वोट बैंक समझा जाता है। चुनाव आते ही नेता घर-घर जाकर वोट मांगते हैं। दिव्यांगों से हाथ जोड़कर समर्थन लिया जाता है। बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं। लेकिन चुनाव खत्म होते ही दिव्यांगों की आवाज दबा दी जाती है। इसी बात पर आज दिव्यांग समाज का गुस्सा फूट पड़ा है। दिव्यांगों का कहना है —“जब हम देश के नागरिक हैं,जब हमारा वोट बराबर है, तो फिर राजनीति में हमारा हक बराबर क्यों नहीं?”

हर चुनाव में महिलाओं, युवाओं और अलग-अलग वर्गों की बात होती है, लेकिन दिव्यांग समाज को हमेशा नजरअंदाज किया जाता है। क्या दिव्यांग सिर्फ वोट देने के लिए हैं? क्या उन्हें नेतृत्व करने का अधिकार नहीं? क्या उनके सपने और अधिकार कोई मायने नहीं रखते? दिव्यांग समाज अब चुप नहीं बैठेगा। अब मांग उठ रही है कि जम्मू-कश्मीर में दिव्यांगों के लिए कम से कम एक सीट आरक्षित की जाए, ताकि उनकी आवाज विधानसभा और पंचायत तक पहुंच सके।

दिव्यांगों का कहना है कि —“हम दया नहीं, अपना अधिकार मांग रहे हैं।”“हमें सहानुभूति नहीं, बराबरी चाहिए।”“हम भी इस लोकतंत्र का हिस्सा हैं।” आज जरूरत है कि सरकार और चुनाव आयोग इस मुद्दे को गंभीरता से लें।अगर देश में हर वर्ग को प्रतिनिधित्व मिल सकता है, तो दिव्यांग समाज को क्यों नहीं?

दिव्यांग समाज अब अपने अधिकारों के लिए एकजुट हो चुका है। अब सवाल सिर्फ एक सीट का नहीं, सम्मान और बराबरी का है। अगर अब भी दिव्यांगों की आवाज को अनसुना किया गया, तो आने वाले समय में यह आंदोलन और बड़ा रूप ले सकता है।

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