Statehood Resolution पर Sunil Sharma के सवाल, बोले- जनता के असली मुद्दे पीछे छूट गए

Edited By Neetu Bala, Updated: 30 Sep, 2026 08:26 PM

sunil sharma raises questions on the statehood resolution too

जम्मू-कश्मीर विधानसभा में विपक्ष के नेता सुनील शर्मा ने बुधवार को उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली सरकार पर विधानसभा के शरदकालीन सत्र के दौरान समाज के विभिन्न वर्गों की चिंताओं को दूर करने में विफल रहने का आरोप लगाया।

श्रीनगर ( मीर आफताब ) :   जम्मू-कश्मीर विधानसभा में विपक्ष के नेता सुनील शर्मा ने बुधवार को उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली सरकार पर विधानसभा के शरदकालीन सत्र के दौरान समाज के विभिन्न वर्गों की चिंताओं को दूर करने में विफल रहने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सात दिन के इस सत्र ने उन लोगों को निराश किया जो अपनी समस्याओं के समाधान का इंतजार कर रहे थे।

शरदकालीन सत्र के समापन के बाद श्रीनगर में पत्रकारों से बात करते हुए शर्मा ने कहा कि बीजेपी ने सत्र के पहले दिन सभी जिला मुख्यालयों के लोगों से मिली समस्याओं को उठाया था। इनमें डिलीवरी वर्कर, कॉन्ट्रैक्ट और दिहाड़ी कर्मचारी, NHM और NYC वर्कर, आशा और आंगनवाड़ी वर्कर, GRS और टेक्निकल असिस्टेंट, CAMPA वर्कर और पानी की जांच करने वाली प्रयोगशालाओं के कर्मचारियों से जुड़े मुद्दे शामिल थे।

उन्होंने आरोप लगाया कि सत्र के दौरान बीजेपी द्वारा इन मुद्दों को उठाए जाने के बावजूद सरकार इनका जवाब देने में विफल रही। शर्मा ने सरकार द्वारा सत्र को "फलदायी" बताए जाने पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि लोगों को सरकार द्वारा किए गए वादों और घोषणाओं पर स्पष्टीकरण की उम्मीद थी।

राज्य का दर्जा बहाल करने के मुद्दे पर शर्मा ने आरोप लगाया कि राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को 1953 से पहले की स्थिति और अनुच्छेद 370 व 35A से जोड़ने से इस मांग को कमजोर किया गया है।

उन्होंने कहा, "बीजेपी राज्य का दर्जा बहाल करने के लिए प्रतिबद्ध है। हालांकि, 1953 से पहले की स्थिति और अनुच्छेद 370 व 35A की बहाली को राज्य का दर्जा बहाल करने के मुद्दे से नहीं जोड़ा जा सकता है।"

उन्होंने प्रस्ताव का समर्थन करने के लिए कांग्रेस की भी आलोचना की। उन्होंने 1953 से पहले की व्यवस्था को बहाल करने पर कांग्रेस के रुख पर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि इस तरह के रुख से अलग संविधान की मांग उठ सकती है।

शर्मा ने प्रस्ताव को मंजूरी देने में विधानसभा अध्यक्ष की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि BJP ने अध्यक्ष को हटाने का प्रस्ताव पेश किया था और उनसे नैतिक आधार पर पद छोड़ने का आग्रह किया था। बीजेपी नेता ने कहा कि पार्टी ने "वादे बनाम कामकाज" (Promises versus Performance) नाम से एक डॉक्युमेंट तैयार किया है, जिसमें सरकार के वादों और उसके कामकाज को दिखाया गया है।

जम्मू-कश्मीर में लगभग 13,000 डॉक्टरों और पैरामेडिक्स की कमी का दावा करते हुए, शर्मा ने कहा कि अस्पतालों में अभी भी स्टाफ की कमी है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पब्लिक सर्विस कमीशन (PSC) और जम्मू-कश्मीर सर्विस सिलेक्शन बोर्ड (JKSSB) का ठीक से इस्तेमाल करने में नाकाम रही है।

उन्होंने यह भी दावा किया कि लगभग 3.75 लाख लोगों के पास अभी भी नल से पानी का कनेक्शन नहीं है और आरोप लगाया कि जल जीवन मिशन को लागू करने का काम ठीक से आगे नहीं बढ़ा है।

शर्मा ने डिलीवरी वर्कर्स, NHM कर्मचारियों, NYC, पैरामेडिक्स, आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, GRS और टेक्निकल असिस्टेंट्स और CAMPA कर्मचारियों की चिंताओं को भी उठाया।

उन्होंने कहा कि अलग-अलग जगहों पर स्कूलों और अस्पतालों में स्टाफ की कमी सरकार की नाकामियों को दिखाती है।

शर्मा ने आगे दावा किया कि विधानसभा में सत्ताधारी पार्टी के विधायकों द्वारा उठाए गए सवाल सरकार के कामकाज को लेकर सत्ता पक्ष के सदस्यों की नाराजगी को दिखाते हैं।

आतंकवाद पर शर्मा ने कहा कि स्थानीय युवाओं के उग्रवाद में शामिल होने की घटनाओं में कमी आई है।

उन्होंने दावा किया कि 2025 और 2026 के दौरान जम्मू-कश्मीर के किसी भी युवा ने भारत के खिलाफ हथियार नहीं उठाए हैं, और पुलवामा में एक टूर्नामेंट में लगभग 50,000 युवाओं की भागीदारी को बदलते हालात का संकेत बताया।

उन्होंने यह भी दावा किया कि विदेशी आतंकवादियों को पहले जो इकोसिस्टम मिलता था, वह कमजोर हो गया है और विदेशी आतंकवादियों की संख्या में भी कमी आई है।

शर्मा ने जोर देकर कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस की सरकार अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाएगी, क्योंकि वह "गिरने की कगार पर" है।

1953 से पहले के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि इस मामले की जांच सही संवैधानिक संस्थाओं और एजेंसियों द्वारा की जानी चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि जम्मू-कश्मीर का चरित्र "सबको साथ लेकर चलने वाला" (inclusive) है, जिसमें अलग-अलग धार्मिक और सामाजिक समुदायों के लोग शामिल हैं, और उन्होंने अलग संविधान या झंडे की किसी भी मांग का विरोध किया।

आरक्षण पर शर्मा ने कहा कि हर किसी को अपनी आवाज़ उठाने और अपने अधिकारों की मांग करने का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन उन्होंने इस मामले पर और कुछ कहने से इनकार कर दिया क्योंकि यह मामला अभी कोर्ट में विचाराधीन है। उन्होंने फिर से कहा कि BJP का रुख़ यह है कि अनुच्छेद 370 और 35A को हटाने के बाद बने संवैधानिक ढांचे के तहत ही राज्य का दर्जा बहाल किया जाए।

उन्होंने कहा, "राज्य का दर्जा हमारे एजेंडे का हिस्सा है और यह मिलेगा।"

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