Edited By Neetu Bala, Updated: 30 Sep, 2026 01:26 PM

मीडिया को संबोधित करते हुए कांग्रेस नेताओं ने 29 सितंबर को कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) द्वारा पारित प्रस्तावों का हवाला दिया। नेताओं ने कहा कि पार्टी ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, SIR प्रक्रिया को निलंबित करने तथा पार्टी के दावे...
बारामूला ( रेज़वान मीर ) : जिला कांग्रेस कमेटी (DCC) बारामूला ने जिला अध्यक्ष मीर इकबाल के नेतृत्व में वरिष्ठ नेताओं और पार्टी कार्यकर्ताओं की मौजूदगी में आज बारामूला स्थित कांग्रेस कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। इस दौरान भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के कामकाज, मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) तथा मतदाता सूची में किए जा रहे बदलावों को लेकर पार्टी की चिंताओं को सामने रखा गया।
मीडिया को संबोधित करते हुए कांग्रेस नेताओं ने 29 सितंबर को कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) द्वारा पारित प्रस्तावों का हवाला दिया। नेताओं ने कहा कि पार्टी ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, SIR प्रक्रिया को निलंबित करने तथा पार्टी के दावे के अनुसार मतदाता सूचियों से हटाए गए 13.3 करोड़ नामों को बहाल करने की मांग की है।
DCC बारामूला ने कहा कि कांग्रेस मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण में अधिक पारदर्शिता चाहती है। पार्टी ने मांग की कि मतदाता सूचियों में नाम जोड़ने और हटाने से संबंधित पूरा आंकड़ा राजनीतिक दलों को उपलब्ध कराया जाए। साथ ही, जिन मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जाते हैं, उन्हें इसका कारण बताया जाए और उन्हें अपील करने का निष्पक्ष अवसर दिया जाए।
कांग्रेस नेताओं ने SIR प्रक्रिया से जुड़े कुछ निर्णयों और प्रक्रियाओं को लेकर निर्वाचन आयुक्तों के बीच कथित मतभेदों पर भी चिंता व्यक्त की। नेताओं ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर भी निर्वाचन आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी द्वारा कुछ मामलों में लिखित आपत्तियां दर्ज किए जाने की खबरें सामने आई हैं।
जम्मू-कश्मीर के संदर्भ में कांग्रेस ने कहा कि पर्याप्त सुरक्षा उपायों, सभी राजनीतिक दलों से परामर्श और बूथ-वार आंकड़ों के प्रकाशन के बिना किसी भी प्रकार का SIR नहीं किया जाना चाहिए। पार्टी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोग अपने चुनावी अधिकारों की बहाली का वर्षों से इंतजार कर रहे हैं।
कांग्रेस ने एक स्वतंत्र और समयबद्ध जांच की अपनी मांग भी दोहराई। पार्टी ने निर्वाचन आयोग की चुनाव प्रबंधन प्रणालियों के बाहरी ऑडिट सहित व्यापक जांच की मांग करते हुए निर्वाचन आयोग को एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था के रूप में और मजबूत करने की बात कही।
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