Kashmir में सूखे का खतरा: स्कॉस्ट-कश्मीर की किसानों को Urgent Advisory

Edited By Neetu Bala, Updated: 07 Mar, 2026 11:02 AM

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शेर-ए-कश्मीर यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज एंड टैक्नोलॉजी ऑफ कश्मीर (स्कॉस्ट-कश्मीर) के एक्सपर्ट्स ने कश्मीर घाटी में लगातार सूखे मौसम को देखते हुए शुक्रवार को एक अर्जैंट एडवाइजरी जारी की है।

श्रीनगर/जम्मू  (कमल) :  शेर-ए-कश्मीर यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज एंड टैक्नोलॉजी ऑफ कश्मीर (स्कॉस्ट-कश्मीर) के एक्सपर्ट्स ने कश्मीर घाटी में लगातार सूखे मौसम को देखते हुए शुक्रवार को एक अर्जैंट एडवाइजरी जारी की है। किसानों से कहा गया है कि वे मिट्टी की नमी बचाने और बढ़ते तापमान व बारिश की कमी के असर को कम करने के लिए तुरंत फसल सुरक्षा के उपाय करें। फल उगाने वालों के लिए सबसे जरूरी सलाह है कि नमी बनाए रखने के लिए पेड़ों के बेसिन में 4-6 इंच ऑर्गैनिक मल्च जैसे धान का भूसा या घास की कतरन डालें।
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पॉलीथीन शीट से बचने की खास सलाह

स्कॉस्ट-कश्मीर के एग्रोमेटोरोलॉजी डिवीजन के एक्सपर्ट्स ने खास तौर पर पॉलीथीन शीट जैसे इनऑर्गैनिक मल्च के इस्तेमाल के खिलाफ चेतावनी दी है जो मिट्टी का तापमान बढ़ा सकते हैं और रूट सिस्टम को नुकसान पहुंचा सकते हैं। जिन बागों में सिंचाई की कमी है वहां यूनिवर्सिटी सलाह देती है कि जब तक मिट्टी में काफी नमी न आ जाए, तब तक सभी फर्टिलाइजर का इस्तेमाल न करें। यह सलाह उन खेतों की फसलों के लिए भी है जहां गेहूं, सरसों और मटर उगाने वालों को अपने खेतों पर नियमित नजर रखने और कम पानी के लिए मुकाबला खत्म करने के लिए इंटरकल्चरल ऑपरेशन के जरिए खरपतवार हटाने को प्राथमिकता देने के लिए कहा जाता है। इन फसलों में यूरिया का इस्तेमाल सिर्फ 2.5 किलोग्राम प्रति कनाल तक ही सीमित होना चाहिए और सिर्फ तभी किया जाना चाहिए जब काफी नमी हो।

ट्यूलिप की खेती के लिए बार-बार सिंचाई करने की सलाह

स्कॉस्ट ने सब्जियों और फूलों की खेती के लिए खासकर ट्यूलिप की खेती के लिए सुबह जल्दी या देर शाम के समय हल्की और बार-बार सिंचाई करने की सलाह दी है। इसी तरह टमाटर, मिर्च, शिमला मिर्च और पत्तागोभी जैसी फसलों के लिए नर्सरी बैड को गर्मी के तनाव को कम करने के लिए शैड नैट या पुआल से ढंकने को कहा गया है।

मछली पालन सैक्टर के लिए सलाह जारी

स्कॉस्ट ने मछली पालन सैक्टर के लिए सलाह जारी की है और कहा कि एरेशन सिस्टम (वायु संचारण) के जरिए घुले हुए ऑक्सीजन लैवल को 6 एम.जी./एल. से ऊपर बनाए रखना बहुत जरूरी है। मछली पालने वालों को पानी की गहराई 1.5-2 मीटर बनाए रखनी चाहिए और कम ऑक्सीजन वाली जगहों पर शरीर के वजन के 1-1.5 प्रतिशत तक फीडिंग रेट कम करनी चाहिए, इस मुश्किल मौसम में मछलियों की सेहत बनाए रखने के लिए विटामिन-सी और प्रोबायोटिक्स के साथ हाई-प्रोटीन फ्लोटिंग पेलेट्स का इस्तेमाल करना चाहिए।

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