Edited By VANSH Sharma, Updated: 11 Feb, 2026 05:49 PM

जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश की विधानसभा में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला कल जम्मू और कश्मीर सिविल न्यायालय (संशोधन) बिल, 2026 पेश करेंगे।
जम्मू/किश्तवाड़ (तनवीर सिंह): जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश की विधानसभा में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला कल जम्मू और कश्मीर सिविल न्यायालय (संशोधन) बिल, 2026 पेश करेंगे। इस बिल का मकसद प्रदेश में न्यायिक पदों के नाम को अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के अनुरूप करना है।
जानकारी के अनुसार, इस संशोधन के तहत मुंसिफ और अधीनस्थ न्यायाधीशों के पदनाम बदलकर सिविल जज (जूनियर डिवीजन) और सिविल जज (सीनियर डिवीजन) किया जाएगा, ताकि न्यायिक व्यवस्था में एकरूपता लाई जा सके।
इस मुद्दे पर पीडीपी ने कड़ा विरोध जताया है। पीडीपी के पूर्व एमएलसी फिरदौस टाक ने कहा कि अब नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) और भाजपा में कोई फर्क नहीं रह गया है। उनका आरोप है कि भाजपा ने जम्मू-कश्मीर की विशेष संवैधानिक पहचान को खत्म किया और अब एनसी की कार्रवाई भी उसी दिशा में उठाया गया कदम है। उन्होंने कहा कि भले ही यह बदलाव केवल नाम का लगे, लेकिन यह भाजपा द्वारा शुरू किए गए काम को आगे बढ़ाने जैसा है।
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