Edited By Neetu Bala, Updated: 06 Mar, 2026 06:59 PM

जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद पर लगाम लगाने के लिए ईको सिस्टम को ध्वस्त करने में सुरक्षाबलों एवं सुरक्षा एजैंसियों ने काफी हद तक सफलता हासिल की है
जम्मू (उदय): जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद पर लगाम लगाने के लिए ईको सिस्टम को ध्वस्त करने में सुरक्षाबलों एवं सुरक्षा एजैंसियों ने काफी हद तक सफलता हासिल की है और आतंकियों की हिंसक गतिविधियों पर लगाम लगाई है परन्तु अभी भी सुरक्षाबलों एवं सुरक्षा एजैंसियों के लिए भूमिगत मददगार चुनौती बने हुए हैं जो आतंकवादियों को उनके मंसूबों को कामयाब बनाने में विस्फोटक के साथ-साथ मॉडर्न उपकरण मुहैया करवाने में मदद कर रहे हैं।
कश्मीर में आतंकवादियों को हथियार एवं रहने-ठहरने में मदद करने वालों पर सुरक्षाबलों ने शिकंजा कसा और उनके तंत्र को काफी हद तक लगाम लगाई जिससे कश्मीर में हिंसक घटनाओं में कमी आई है। 2 वर्ष पहले सीमा पार बैठे आतंकियों ने हाईब्रिड आतंकियों की मदद से अल्पसंख्यकों को निशाना बना कर हालात बिगाड़ने का प्रयास किया लेकिन सुरक्षाबलों ने आखिरकार इन हाईब्रिड आतंकियों पर लगाम लगाने में तकनीकी मदद से सफलता हासिल की परन्तु व्हाइट कॉलर आतंकियों ने कश्मीर के बाहर बड़ी आतंकी वारदात को अंजाम देने का प्रयास किया परन्तु लाल किले के निकट विस्फोट के बाद जांच में कई खुलासे होते गए कि किस प्रकार अलग-अलग चैनल के माध्यम से ऐसा सामान खरीदा गया जो विस्फोटक बनाने में मददगार साबित होता है।
गौरतलब है कि सुरक्षा एजैंसियों ने पुलवामा हमले की जांच में पाया कि कुछ सामग्री ऑनलाइन मंगवाई गई थी जिससे विस्फोटक तैयार किया गया।
अब पहलगाम हमले की NIA जांच में सामने आया कि ग्रोपो कैमरे की खरीद का मामला चौंकाने वाला है जिसमें चीन से खरीददार को लेकर जानकारी मांगी गई है। इस कैमरे का इस्तेमाल बायसरन में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकी हमले के दौरान किया गया जिसमें 26 पर्यटकों को धर्म के आधार पर मौत के घाट उतार दिया गया। जांच में कुछ लोगों को पकड़ा गया है जिन्होंने आतंकवादियों की मदद की थी और इन आतंकियों को सुरक्षाबलों ने जबरवान की पहाड़ियों में मुठभेड़ में ढेर कर दिया था। कैमरे की खरीद करने वाले का नाम सामने आने के बाद और गहराई से जांच होगी। सुरक्षाबलों को अब ऐसी खरीद पर भी नजर रखनी होगी ताकि ऐसे आतंकी मददगारों की धरपकड़ की जा सके। आतंकियों के पास एम-4 कारबाइन राइफल होने के कारण सुरक्षाबलों को मुठभेड़ में थोड़ी कठिनाई हुई। वहीं मॉडर्न उपकरण के इस्तेमाल को लेकर एडवांस तकनीक से मदद लेनी होगी ताकि बड़ी हिंसक वारदात को विफल बनाया जा सके।
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