Delhi ब्लास्ट मामला: ‘व्हाइट कॉलर’ आतंकी मॉड्यूल की जांच में चौंकाने वाले खुलासे

Edited By VANSH Sharma, Updated: 15 Feb, 2026 05:40 PM

shocking revelations in the investigation of the  white collar  terrorist module

जम्मू-कश्मीर पुलिस द्वारा हाल ही में एक कथित सफेदपोश आतंकवादी नेटवर्क का पर्दाफाश किए जाने के बाद जांच में सामने आया है।

जम्मू-कश्मीर डेस्क: जम्मू-कश्मीर पुलिस द्वारा हाल ही में एक कथित सफेदपोश आतंकवादी नेटवर्क का पर्दाफाश किए जाने के बाद जांच में सामने आया है कि इस मामले में गिरफ्तार चिकित्सक वर्ष 2016 से ही कट्टरपंथ की ओर झुक चुका था और उसने आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए अंसार इंटरिम नाम से एक नया संगठन बनाया था। अधिकारियों के अनुसार अब इस मामले की जांच राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) कर रही है।

जांच में यह भी पता चला कि 10 नवम्बर को लाल किला के बाहर हुए विस्फोट में इस्तेमाल कार चला रहा डॉ. उमर-उन-नबी पहले 2016 और 2018 में आतंकी संगठनों में शामिल होने की कोशिश कर चुका था, लेकिन सफल नहीं हुआ था। इस विस्फोट में 10 से अधिक लोगों की मौत हुई थी।

अधिकारियों के मुताबिक आरोपी चिकित्सक मुजम्मिल गनी, उमर-उन-नबी (मृत), अदील राठेर, फरार मुज़फ्फर राथर, मौलवी इरफान, कारी आमिर और तुफैल गाज़ी अप्रैल 2022 में श्रीनगर के ईदगाह क्षेत्र में मिले थे, जहां उन्होंने अंसार इंटरिम बनाने का निर्णय लिया। अदील को अमीर (प्रमुख), मौलवी इरफान को उप-अमीर और गनी को कोषाध्यक्ष बनाया गया, जबकि उमर ने समन्वय तथा वित्त-खरीद की जिम्मेदारी संभाली।

अधिकारियों ने बताया कि “अंसार” शब्द आम तौर पर वैश्विक प्रतिबंधित आतंकी संगठन अल-कायदा से जुड़ा माना जाता है। पूछताछ में आरोपियों ने कहा कि सक्रिय आतंकवादियों से संपर्क टूट जाने के कारण उन्हें नया समूह बनाने की जरूरत महसूस हुई। वर्ष 2023 में समूह ने हरियाणा के सोहना और नूंह से उर्वरक तथा फरीदाबाद की एक दुकान से एनपीके (पोटेशियम नाइट्रेट) खरीदा।

पूछताछ में यह भी सामने आया कि उमर ने ऑनलाइन वीडियो देखकर आईईडी बनाना सीखा और ट्राइएसीटोन ट्राइपेरॉक्साइड (टीएटीपी) तैयार करने में सफल रहा। अदील ने दक्षिण कश्मीर के दानिश उर्फ जसीर को भर्ती किया, जिसे फिदायीन हमले के लिए मनाने की कोशिश की गई, लेकिन उसने अंतिम समय में मना कर दिया। उमर को कश्मीर, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में फैले नेटवर्क का सबसे कट्टर सदस्य और मुख्य संचालक माना जा रहा है।

सबूतों के अनुसार मूल योजना राष्ट्रीय राजधानी या किसी धार्मिक स्थल की भीड़भाड़ वाली जगह पर वाहन-आधारित विस्फोटक (वीबीआईईडी) लगाकर भागने की थी। हालांकि श्रीनगर पुलिस की जांच में गनी की गिरफ्तारी और विस्फोटक बरामद होने के बाद उमर घबरा गया और कथित तौर पर लाल किले के बाहर समय से पहले विस्फोट कर दिया।

इस नेटवर्क का खुलासा 19 अक्टूबर को श्रीनगर के बुनपोरा, नौगाम इलाके में जैश-ए-मोहम्मद के पोस्टर मिलने के बाद शुरू हुई जांच से हुआ। सीसीटीवी के आधार पर आरिफ निसार डार उर्फ साहिल, यासिर-उल-अशरफ और मकसूद अहमद डार उर्फ शाहिद को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ के बाद शोपियां निवासी मौलवी इरफान अहमद को भी गिरफ्तार किया गया, जिस पर पोस्टर उपलब्ध कराने और युवाओं को कट्टरपंथ की ओर प्रेरित करने का आरोप है।

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