खुलासा :  जम्मू की जेलों तक पहुंच रहे पाकिस्तानी Signal, क्या रची जा रही है कोई नई साजिश?

Edited By Neetu Bala, Updated: 31 May, 2026 08:37 PM

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जम्मू-कश्मीर का सुरक्षा वातावरण बेहद संवेदनशील है, जो सीमा पार से भेजे जाने वाले सिग्नल, ड्रोन संचालित उपकरणों और बदलते दूरसंचार स्पेक्ट्रम के कारण और भी जटिल हो जाता है।

श्रीनगर/जम्मू :  पाकिस्तान सीमा पार से जम्मू-कश्मीर में जानबूझकर गैर-जरूरी दूरसंचार सिग्नल भेजकर अंतर्राष्ट्रीय दूरसंचार मानदंडों का उल्लंघन कर रहा है और उसकी इस नापाक हरकत का उद्देश्य केंद्र-शासित प्रदेश, खास तौर पर जम्मू क्षेत्र में सक्रिय आतंकवादी समूहों को संचार की गुप्त सुविधा प्रदान करना है।

अधिकारियों ने कहा कि हाल में भेजे गए सिग्नल, खास तौर पर पीर पंजाल पर्वतमाला के दक्षिण में भेजे गए सिग्नल संकेत देते हैं कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (Pok) में नियंत्रण रेखा (LoC) के पास दूरसंचार टावरों की स्थापना में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिनके सिग्नल जम्मू की विभिन्न जेल तक पहुंचते हैं, जहां कुख्यात आतंकवादी कैद हैं। उन्होंने कहा कि कश्मीर घाटी के पहाड़ इनमें से ज्यादातर सिग्नल को प्राकृतिक रूप से रोक देते हैं, लेकिन जम्मू के मैदानी इलाकों की सपाट स्थलाकृति के कारण ये सिग्नल भारतीय क्षेत्र में प्रवेश कर जाते हैं।

अधिकारियों के मुताबिक, कठुआ, राजौरी और पुंछ जैसे सीमावर्ती जिलों के अलावा जम्मू के अत्यधिक संवेदनशील कोट बलवाल जेल क्षेत्र में पाकिस्तान से भेजे जाने वाले सिग्नल की पहचान की गई है। उन्होंने बताया कि आतंकवाद प्रभावित क्षेत्र की कुछ जेल में अवैध तरीके से पहुंचाए गए मोबाइल फोन का इस्तेमाल कथित तौर पर अभी भी जारी है और इन प्रतिष्ठानों में वर्तमान में इस्तेमाल किए जा रहे जैमर पाकिस्तान से भेजे जाने वाले सिग्नल को अवरुद्ध करने तथा कैदियों की ओर से किए जाने वाले संचार को रोकने में नाकाम रहे हैं। जम्मू-कश्मीर में 14 जेल और दो सुधार गृह हैं।

अधिकारियों के अनुसार, चूंकि जम्मू-कश्मीर का सुरक्षा वातावरण बेहद संवेदनशील है, जो सीमा पार से भेजे जाने वाले सिग्नल, ड्रोन संचालित उपकरणों और बदलते दूरसंचार स्पेक्ट्रम के कारण और भी जटिल हो जाता है, इसलिए यहां पारंपरिक जैमर के बजाय अगली पीढ़ी के उपकरण लगाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि पारंपरिक जैमर न केवल सुरक्षा व्यवस्था में सेंधमारी का जोखिम बढ़ाते हैं, बल्कि आस-पास के नागरिक समुदायों को भी काटते हैं।

अधिकारियों ने बताया कि नई प्रौद्योगिकी विशिष्ट क्षेत्रों के भीतर सक्रिय अनधिकृत उपकरणों का पता लगाने और उन्हें निष्क्रिय करने के मक्सद से तैयार की गई है। उन्होंने बताया कि 2019-20 में सुरक्षा एजैंसियों ने सीमा पार मौजूद अनधिकृत संचार नेटवर्क पर ध्यान केंद्रित किया था और 'एन्क्रिप्शन' प्रणाली में सेंध लगाते हुए उन्हें सफलतापूर्वक नष्ट कर दिया था। अधिकारियों ने कहा कि मौजूदा प्रयासों का भी यही हश्र होगा।

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