Edited By Subhash Kapoor, Updated: 15 Jun, 2026 11:10 PM

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के तहत गुलमर्ग में कथित भूमि लेन-देन अनियमितताओं की जांच के सिलसिले में 9 प्रमुख होटल कारोबारियों को तलब किया है। तलब किए गए लोगों में ग्रैंड मुमताज़ और रेडिसन ग्रुप के मालिक मुश्ताक...
कश्मीर (रिजवान मीर): प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के तहत गुलमर्ग में कथित भूमि लेन-देन अनियमितताओं की जांच के सिलसिले में 9 प्रमुख होटल कारोबारियों को तलब किया है। तलब किए गए लोगों में ग्रैंड मुमताज़ और रेडिसन ग्रुप के मालिक मुश्ताक अहमद गनई उर्फ मुश्ताक चाया भी शामिल हैं।
ईडी द्वारा जारी समन प्राप्त करने वालों में आईटीसी ग्रुप के मुश्ताक अहमद बुर्जा और मंज़ूर अहमद बुर्जा, एम एंड कंपनी के नज़ीर अहमद मीर, होटल खलील पैलेस के मंज़ूर अहमद खान, होटल मामा पैलेस के अब्दुल हमीद डार, होटल रॉयल पार्क के सैयद मुसद्दिक शाह, कोलाहोई ग्रीन्स के इब्राहिम खान तथा होटल अल्पाइन रिज की सदफ शाह शामिल हैं।
सूत्रों के अनुसार, इन होटल कारोबारियों को सोमवार से ईडी के समक्ष पेश होने और विभिन्न वित्तीय एवं संपत्ति संबंधी दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रत्येक होटल व्यवसायी को अलग-अलग दिन एजेंसी के समक्ष उपस्थित होना है। उनसे बैंक खातों का विवरण, चल एवं अचल संपत्तियों का रिकॉर्ड, राजस्व दस्तावेज, लीज डीड, पिछले पांच वर्षों के आयकर रिटर्न और तत्कालीन जम्मू-कश्मीर रोशनी अधिनियम के तहत दायर आवेदनों से संबंधित दस्तावेज मांगे गए हैं।
नोटिस में कहा गया है कि इन धाराओं के तहत की जाने वाली कार्यवाही को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023 की धाराओं 229 और 267 के अंतर्गत न्यायिक कार्यवाही माना जाएगा। नोटिस में यह भी चेतावनी दी गई है कि निर्धारित समय और स्थान पर उपस्थित न होने अथवा मांगे गए दस्तावेज उपलब्ध न कराने की स्थिति में पीएमएलए और भारतीय न्याय संहिता के अन्य प्रासंगिक प्रावधानों के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए मुश्ताक चाया ने कहा कि उन्होंने ईडी द्वारा मांगे गए सभी दस्तावेज जमा कर दिए हैं, हालांकि वह सोमवार को व्यक्तिगत रूप से एजेंसी के समक्ष उपस्थित नहीं हुए। उन्होंने कहा, “मैंने ईडी द्वारा मांगे गए सभी दस्तावेज उपलब्ध करा दिए हैं, लेकिन आज व्यक्तिगत रूप से पेश नहीं हुआ।”
हालांकि समन में किसी विशेष ईसीआईआर (ECIR) संख्या या विस्तृत आरोपों का उल्लेख नहीं किया गया है, लेकिन रोशनी अधिनियम से संबंधित आवेदन, भूमि रिकॉर्ड और लीज दस्तावेजों की मांग से संकेत मिलता है कि जांच गुलमर्ग में रोशनी योजना के तहत हुए कथित भूमि हस्तांतरणों से जुड़ी हुई है।
सूत्रों के अनुसार, यह जांच वर्ष 2009 में तत्कालीन विजिलेंस ऑर्गेनाइजेशन कश्मीर (वर्तमान एंटी करप्शन ब्यूरो) द्वारा दर्ज एफआईआर संख्या 08/2009 से जुड़ी है। इस एफआईआर में सरकारी अधिकारियों और निजी लाभार्थियों के बीच कथित साजिश का आरोप लगाया गया था, जिसके तहत रिकॉर्ड में हेरफेर कर और कानूनी प्रक्रियाओं को दरकिनार कर गुलमर्ग की बहुमूल्य सरकारी भूमि पर स्वामित्व अधिकार प्रदान किए गए थे।
बताया जाता है कि इस मामले में दाखिल चार्जशीट में अब ईडी द्वारा तलब किए गए कुछ लाभार्थियों के नाम भी शामिल हैं। जांच एजेंसियों ने पहले आरोप लगाया था कि गुलमर्ग की लगभग 35 कनाल और 6 मरला मूल्यवान भूमि पर जम्मू-कश्मीर स्टेट लैंड्स (वेस्टिंग ऑफ ओनरशिप राइट्स टू द ऑक्यूपेंट्स) एक्ट, 2001 के प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए स्वामित्व अधिकार दिए गए थे।
सूत्रों के मुताबिक, ईडी अब इस बात की जांच कर रही है कि गुलमर्ग की इस बहुमूल्य भूमि के कथित हस्तांतरण से कोई अवैध संपत्ति या वित्तीय लाभ तो अर्जित नहीं किया गया, जो मनी लॉन्ड्रिंग के दायरे में आ सकता है।