वैष्णो देवी की तरह मचैल माता यात्रा में भी मिलेगी यह खास सुविधा, श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए अहम कदम

Edited By VANSH Sharma, Updated: 29 Jan, 2026 04:43 PM

machail mata yatra to get rfid safety measures

मचैल माता की पवित्र यात्रा को अब और ज्यादा सुरक्षित बनाने की तैयारी शुरू हो गई है।

जम्मू-कश्मीर डेस्क: मचैल माता की पवित्र यात्रा को अब और ज्यादा सुरक्षित बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। पिछले साल की दर्दनाक घटना से सीख लेते हुए प्रशासन ने एक अहम कदम उठाने का फैसला किया है। अब मचैल यात्रा में आरएफआईडी (RFID) तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा, ताकि हर श्रद्धालु की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

दरअसल, 14 अगस्त 2025 को मचैल यात्रा के दौरान बादल फटने से भारी तबाही हुई थी। इस हादसे में 60 से ज्यादा श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी, 100 से अधिक लोग घायल हुए थे और कई लोग लंबे समय तक लापता रहे। राहत और बचाव कार्य करीब एक महीने तक चला। इस घटना ने साफ कर दिया कि पुरानी व्यवस्थाएं अब पर्याप्त नहीं हैं और नई तकनीक अपनाना जरूरी है।

इसी को ध्यान में रखते हुए प्रशासन अब मचैल यात्रा को वैष्णो देवी यात्रा की तरह आधुनिक और तकनीकी रूप से मजबूत बनाना चाहता है। नई व्यवस्था के तहत हर श्रद्धालु को यात्रा के दौरान एक RFID कार्ड दिया जाएगा। इस कार्ड से यह पता लगाया जा सकेगा कि श्रद्धालु किस समय कहां मौजूद है। अगर किसी तरह की आपात स्थिति आती है, तो राहत और बचाव टीम को तुरंत सही जानकारी मिल सकेगी।

जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव अटल डुल्लू ने सभी जिलों को निर्देश दिए हैं कि अप्रैल से सितंबर के बीच, मानसून से पहले, आपदा से निपटने की पूरी तैयारी कर ली जाए। खास तौर पर बाढ़, भूस्खलन और खराब मौसम से जुड़ी घटनाओं को लेकर प्रशासन हमेशा सतर्क रहे।

राज्य में आपदा प्रबंधन को मजबूत करने के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) और मौसम विभाग के साथ लगातार तालमेल रखा जा रहा है। मौसम की पहले से चेतावनी, लगातार निगरानी और सही समय पर जानकारी पहुंचाने पर खास ध्यान दिया जा रहा है।

RFID सिस्टम के साथ-साथ मचैल यात्रा मार्ग पर सुरक्षित शरण स्थल और सहायक ढांचे बनाने की भी योजना है, ताकि जरूरत पड़ने पर श्रद्धालुओं को सुरक्षित जगहों तक पहुंचाया जा सके। इसके अलावा, वैष्णो देवी समेत सभी बड़े तीर्थ स्थलों पर नियमित मॉक ड्रिल कराने के निर्देश भी दिए गए हैं।

किश्तवाड़ जिला प्रशासन का कहना है कि मचैल हादसे से मिले अनुभवों के आधार पर एक पूरा आपदा प्रबंधन प्लान तैयार किया गया है। प्रशासन का साफ संदेश है कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उम्मीद है कि नई तकनीक, बेहतर योजना और अलग-अलग एजेंसियों के बीच मजबूत तालमेल से मचैल माता की यात्रा आने वाले समय में आस्था के साथ-साथ सुरक्षा की मिसाल बनेगी।

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