Jammu Kashmir में गहराया बिजली संकट, 10-10 घंटों के लग रहे Powercut

Edited By Sunita sarangal, Updated: 19 May, 2026 12:30 PM

jammu kashmir power crisis

आ​धिकारिक सूत्रों के अनुसार प्रदेश में अ​धिकतर परियोजनाएं पाकिस्तान के साथ सिंधु जल समझौते की वजह से रन द वाटर स्कीम पर आधारित है।

जम्मू(संजीव): केंद्र शासित जम्मू कश्मीर में बिजली संकट जैसे हालात पैदा हो गए है। प्रचंड गर्मी पड़ने की वजह से प्रमुख नदियों और दरियाओं में जल स्तर की कमी होने से पन बिजली परियोजनाओं में उत्पादन में गिरावट आने की वजह से ऐसा हुआ है। इसके अलावा गर्मी के मौसम में बिजली की मांग बढ़ने से संकट लगातार गहराता जा रहा है। आलम तो यह है कि जम्मू संभाग में घंटों बिजली की अघो​षित कटौती हो रही है।

आ​धिकारिक सूत्रों के अनुसार प्रदेश में अ​धिकतर परियोजनाएं पाकिस्तान के साथ सिंधु जल समझौते की वजह से रन द वाटर स्कीम पर आधारित है। इसका मतलब यह हैं कि पन बिजली परियोजनाओं में सीमित मात्रा में ही पानी का भंडारण किया जा सकता है। हालांकि केंद्र सरकार ने पिछले साल सिंधु जल समझौता रद्द करने का फैसला लिया हैं कि इस पर अमलीजामा पहनाने में कई साल लगेंगे। वर्तमान में जम्मू कश्मीर में बिजली की मांग बढ़कर 3000 मेगावाट के पार पहुंच चुकी हैं, जबकि जम्मू कश्मीर में सभी स्त्रोतों से करीब 2400 मेगावाट तक बिजली की उपलब्धता ही हो पा रही है और इसमे भी अब भारी कमी हो गई है।

कुल मिलाकर करीब एक हजार मेगावाट की कमी खल रही है और इस वजह से विभाग को अघो​षित कटौती करनी पड़ रही है। ग्रामीण इलाकों में पांच से दस घंटे तक बिजली कटौती हो रही हैं, जबकि शह​री इलाकों में भी तीन से पांच घंटे तक बिजली कटौती प्रतिदिन हो रही है। बिजली ढांचे पर लोड ज्यादा पड़ने की वजह से जम्मू में तीस से 40 ट्रांसफार्मर प्रतिदिन जल रहे है और केंद्रीय वर्कशाप में मुरम्मत के लिए पहुंच रहे है। ट्रांसफार्मर जलने वाले इलाकों में एक से दो दिन तक बिजली गुल रहने का सामना लोगों को करना पड़ रहा हैं और इससे हाहाकार की ​स्थिति पैदा हो रही है।

जम्मू पावर डिवैल्पमैंट कार्पोरेशन के प्रवक्ता के अनुसार नदियों में पानी का बहाव कम होने की वजह से बिजली उत्पादन में गिरावट आई है। कार्पोरेशन ने उपभोक्ताओं से हालात को समझते हुए बिजली का प्रयोग विवेकपूर्ण तरीके से करने की अपील की है।

उल्लेखनीय हैं कि जम्मू-कश्मीर में लोगों की बिजली पर निर्भरता पन बिजली परियोजनाओं पर आधारित ही है। जम्मू-कश्मीर में गैस टरबाइन और थर्मल आधारित कोई भी परियोजना नहीं है।

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