Edited By VANSH Sharma, Updated: 07 Mar, 2026 04:24 PM

सरकारी अधिकारियों के अनुसार, सीमित संसाधनों वाले जम्मू-कश्मीर के लिए पुरानी पेंशन योजना व्यावहारिक नहीं है।
जम्मू-कश्मीर डेस्क: जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने साफ संकेत दिया है कि प्रदेश में पुरानी पेंशन योजना (OPS) को दोबारा लागू नहीं किया जाएगा। सरकार ने इस संबंध में आए प्रस्तावों को खारिज करते हुए कहा है कि यह योजना लंबे समय में आर्थिक रूप से टिकाऊ नहीं है और इससे प्रदेश की वित्तीय स्थिति पर दबाव पड़ेगा।
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, सीमित संसाधनों वाले जम्मू-कश्मीर के लिए पुरानी पेंशन योजना व्यावहारिक नहीं है। इसलिए सरकार नई पेंशन योजना (NPS) को ही जारी रखने के पक्ष में है।
सरकार के आंकड़ों के मुताबिक पेंशन पर खर्च लगातार बढ़ रहा है। वित्त वर्ष 2020-21 में सेवानिवृत्त कर्मचारियों को पेंशन के रूप में 5,829 करोड़ रुपये दिए गए थे, जो 2030-31 तक बढ़कर करीब 11,798 करोड़ रुपये होने का अनुमान है।
पिछले कुछ वर्षों में पेंशन खर्च इस प्रकार रहा:
- 2021-22 में 6,668 करोड़ रुपये
- 2022-23 में 7,463 करोड़ रुपये
- 2023-24 में 8,364 करोड़ रुपये
- 2024-25 में 9,350 करोड़ रुपये
- 2025-26 में करीब 9,127 करोड़ रुपये
अधिकारियों का कहना है कि आने वाले वर्षों में कर्मचारियों के सेवानिवृत्त होने की संख्या बढ़ेगी, जिससे पेंशन पर खर्च और बढ़ सकता है।
सरकार का कहना है कि 2010 में लागू की गई नई पेंशन योजना एक योगदान आधारित व्यवस्था है, जो लंबे समय में अधिक टिकाऊ मानी जाती है। वर्ष 2009 में कैबिनेट के फैसले के बाद 1 जनवरी 2010 या उसके बाद नियुक्त सभी सरकारी कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना की जगह नई पेंशन योजना लागू की गई थी।
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