Edited By Sunita sarangal, Updated: 15 Jun, 2026 03:45 PM

जानकारी के अनुसार, बेहरोट गांव के जिस प्राकृतिक जल स्रोत से पेयजल आपूर्ति की जाती है
राजौरी(शिवम): राजौरी जिले के कोटरंका की बुद्धल तहसील के बेहरोट गांव में स्थित एक प्राकृतिक जल स्रोत में जानवर के अंश मिलने की घटना के बाद क्षेत्र में चिंता और आक्रोश का माहौल है। घटना के बाद ग्रामीणों ने एहतियातन इस स्रोत से आने वाले पानी का उपयोग बंद कर दिया है। प्रशासन, पुलिस और संबंधित विभागों ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार, बेहरोट गांव के जिस प्राकृतिक जल स्रोत से पेयजल आपूर्ति की जाती है, उसी स्रोत में संदिग्ध जानवर के अंश पाए गए। बताया जा रहा है कि इस जल स्रोत से गांव के 100 से अधिक घरों को पानी उपलब्ध कराया जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि जब घरों में पानी की आपूर्ति हुई तो उसमें लाल रंग दिखाई दिया, जिसके बाद लोगों में चिंता फैल गई।
घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय लोगों ने संबंधित विभागों और प्रशासन को सूचित किया। सूचना मिलने पर बड़ी संख्या में ग्रामीण जल स्रोत के पास एकत्र हो गए और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। ग्रामीणों का कहना है कि जल स्रोत को दूषित करने की इस घटना की गहन जांच होनी चाहिए तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
मामले की जानकारी मिलने के बाद जल शक्ति विभाग के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर सुदेश कुमार भगत मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने जल स्रोत से पानी के नमूने एकत्र कर जांच के लिए प्रयोगशाला भेज दिए। अधिकारियों ने बताया कि पानी की गुणवत्ता और उसमें मिले संदिग्ध पदार्थ की वैज्ञानिक जांच कराई जाएगी।
इसके अलावा प्रशासन और पुलिस की टीम भी मौके पर पहुंची तथा जल स्रोत से बरामद जानवर के अंशों को कब्जे में लेकर जांच के लिए भेज दिया। अधिकारियों के अनुसार जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि मिले अंश किस प्रकार के थे और वे जल स्रोत तक कैसे पहुंचे। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
घटना के बाद गांव में एहतियातन सतर्कता बढ़ा दी गई है। ग्रामीणों का कहना है कि वे तब तक इस जल स्रोत का पानी उपयोग नहीं करेंगे जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती और पानी को सुरक्षित घोषित नहीं किया जाता। कई परिवारों ने पीने और घरेलू उपयोग के लिए वैकल्पिक जल स्रोतों का सहारा लेना शुरू कर दिया है।
स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से मामले की शीघ्र एवं निष्पक्ष जांच कर दोषियों की पहचान करने की मांग की है। उनका कहना है कि जल स्रोतों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए भी प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
विभागीय अधिकारियों ने बताया कि प्रभावित ग्रामीणों को वैकल्पिक स्रोतों से सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। जल शक्ति विभाग द्वारा आवश्यकतानुसार टैंकरों और अन्य माध्यमों से पानी उपलब्ध कराया जाएगा। अधिकारियों ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और शांति बनाए रखने की अपील की है।
प्रशासन ने कहा कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और जांच पूरी होने तक सभी पहलुओं की बारीकी से पड़ताल की जाएगी। फिलहाल पूरे क्षेत्र में इस घटना को लेकर चर्चा का माहौल है और लोग जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं।
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