Edited By Sunita sarangal, Updated: 22 Jun, 2026 12:33 PM

चार्जशीट के मुताबिक, वर्ष 2024 की शुरुआत में बारामूला जिले के गोगल दारा जंगल क्षेत्र में ड्रोन के माध्यम से हथियारों की खेप गिराई गई थी।
श्रीनगर(एजैंसी): पहलगाम के बैसरन मैदान में हुए आतंकी हमले की जांच में राष्ट्रीय जांच एजैंसी (एन.आई.ए.) ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। एन.आई.ए. की चार्जशीट के अनुसार आतंकियों को सीमा पार से ड्रोन के जरिए हथियार, गोला-बारूद और नकदी पहुंचाई गई थी। जांच में यह भी सामने आया है कि हमले से पहले आतंकी लंबे समय तक कश्मीर घाटी में सक्रिय रहे, लेकिन सुरक्षा एजैंसियों की नजर से बचते रहे। खुफिया तंत्र की कमजोर कड़ी के कारण 26 जानें गई थीं, जिसके कारण खुफिया तंत्र पर कई सवाल उठ रहे हैं।
चार्जशीट के मुताबिक, वर्ष 2024 की शुरुआत में बारामूला जिले के गोगल दारा जंगल क्षेत्र में ड्रोन के माध्यम से हथियारों की खेप गिराई गई थी। इसमें 20 पिस्तौल, 15 लाख रुपए नकद और त्रिकोणीय आकार के बम (चीनी ग्रेनेड) शामिल थे। जांच एजैंसी का मानना है कि आतंकियों ने इन हथियारों का इस्तेमाल अपने नेटवर्क को मजबूत करने और हमले की तैयारी में किया।
हमलावर ने पहाड़ी और शहरी इलाकों में की आवाजाही
एन.आई.ए. ने अपनी जांच में आतंकियों की गतिविधियों और उनके आवागमन का विस्तृत विवरण दिया है। जांच से पता चला है कि हमलावर पहाड़ी और शहरी इलाकों से होकर लगातार आवाजाही करते रहे, लेकिन किसी भी स्तर पर उनकी मौजूदगी का समय रहते पता नहीं चल सका।
मानव खुफिया तंत्र पूरी तरह फेल
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि वर्ष 2022 से 2024 के बीच मानव खुफिया तंत्र (ह्यूमन इंटेलिजैंस) कमजोर पड़ने का आतंकियों ने फायदा उठाया। विशेषज्ञों के अनुसार, तकनीकी निगरानी पर बढ़ती निर्भरता और स्थानीय स्तर पर सूचना जुटाने वाले नेटवर्क के कमजोर होने से सुरक्षा व्यवस्था में एक बड़ा खालीपन पैदा हो गया था।
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