Edited By VANSH Sharma, Updated: 20 Jan, 2026 06:04 PM

इस दिशा में गृह मंत्रालय ने एक अहम अधिसूचना जारी की है, जिसके तहत देश के 5 केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपालों (LG) और प्रशासकों को विशेष अधिकार दिए गए हैं।
जम्मू-कश्मीर डेस्क: केंद्र सरकार ने लोगों को गुमराह करने वाले झूठे और भ्रामक मेडिकल विज्ञापनों के खिलाफ सख्ती बढ़ा दी है। खासकर कैंसर, डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारियों के “चमत्कारी इलाज” का दावा करने वाले प्रचार पर अब सीधे कार्रवाई की जाएगी।
इस दिशा में गृह मंत्रालय ने एक अहम अधिसूचना जारी की है, जिसके तहत देश के 5 केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपालों (LG) और प्रशासकों को विशेष अधिकार दिए गए हैं। अब ये अधिकारी ऐसे भ्रामक विज्ञापनों से जुड़े मामलों में बिना देरी कार्रवाई कर सकेंगे।
नई व्यवस्था के तहत उपराज्यपाल और प्रशासक संदिग्ध संस्थानों की तलाशी ले सकेंगे, जरूरी दस्तावेज जब्त कर सकेंगे और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर कानूनी प्रक्रिया शुरू कर सकेंगे। जरूरत पड़ने पर वे गजेटेड अधिकारियों को भी जांच और कार्रवाई के अधिकार सौंप सकेंगे।
गृह मंत्रालय के आदेश के अनुसार यह व्यवस्था जम्मू-कश्मीर, चंडीगढ़, लक्षद्वीप, दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव, और पुडुचेरी में लागू होगी। राष्ट्रपति के निर्देशों के तहत इन केंद्र शासित प्रदेशों में उपराज्यपाल या प्रशासक अब राज्य सरकार जैसी शक्तियों का इस्तेमाल कर पाएंगे।
यह कार्रवाई ड्रग्स एंड मैजिक रेमेडीज (आपत्तिजनक विज्ञापन) अधिनियम, 1954 के तहत की जाएगी। इस कानून का उद्देश्य प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में दवाओं से जुड़े बढ़ा-चढ़ाकर किए गए दावों और झूठे प्रचार पर रोक लगाना है। इसके दायरे में आयुष (AYUSH) से जुड़े उत्पादों के विज्ञापन भी आते हैं।
सरकार का मानना है कि इस कदम से आम लोगों को झूठे इलाज के दावों से बचाया जा सकेगा और स्वास्थ्य के नाम पर होने वाली धोखाधड़ी पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकेगा।
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