Edited By Sunita sarangal, Updated: 03 Apr, 2025 03:10 PM
हालांकि रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि जम्मू-कश्मीर में छोटे विद्यालयों की बढ़ती संख्या शिक्षा के प्रभावी संचालन में बाधा बन सकती है।
जम्मू: जम्मू-कश्मीर में छोटे स्कूलों की संख्या बढ़ रही है जबकि सरकारी स्कूलों में नामांकन और छात्र सीखने के स्तर में सुधार हुआ है। वार्षिक शिक्षा स्थिति रिपोर्ट (ए.एस.ई.आर.) 2024 के अनुसार जम्मू-कश्मीर में 80 प्रतिशत से अधिक सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में 60 से कम विद्यार्थी हैं। हालांकि 6-14 वर्ष की आयु के बच्चों का विद्यालय नामांकन 95 प्रतिशत से अधिक बना हुआ है, लेकिन छोटे विद्यालयों की संख्या बढ़ने से बहुस्तरीय शिक्षण (मल्टी-ग्रेड शिक्षण) की समस्या सामने आई है, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।
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छात्र पढ़ाई छोड़ने की दर में आई गिरावट
रिपोर्ट के मुताबिक जम्मू-कश्मीर में 15-16 वर्ष के विद्यार्थियों की पढ़ाई छोड़ने की दर 2018 में 13.1 प्रतिशत थी, जो 2024 में घटकर 7.9 प्रतिशत रह गई है। यह साबित करता है कि विद्यार्थी अब पहले की तुलना में शिक्षा को जारी रखने में अधिक रुचि ले रहे हैं।
बुनियादी साक्षरता और गणना कौशल में सुधार
विद्यार्थियों की पढ़ने और गणना करने की क्षमता में भी सुधार देखा गया है। जम्मू-कश्मीर में कक्षा 3 के वे विद्यार्थी जो कक्षा 2 के स्तर की पुस्तक पढ़ सकते हैं, उनकी संख्या 2018 में 20.9 प्रतिशत थी, जो 2024 में बढ़कर 23.4 प्रतिशत हो गई। इसी तरह, कक्षा 3 के विद्यार्थियों की बुनियादी घटाव करने की क्षमता 2018 में 28.2 प्रतिशत थी, जो 2024 में बढ़कर 33.7 प्रतिशत हो गई।
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डिजिटल शिक्षा का बढ़ता दायरा
तकनीकी प्रगति के चलते जम्मू-कश्मीर में 14-16 वर्ष के 90 प्रतिशत से अधिक विद्यार्थियों के घरों में दूरभाष यंत्र (स्मार्टफोन) उपलब्ध हैं, जिनमें से 57 प्रतिशत विद्यार्थी शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए इनका उपयोग कर रहे हैं।
विद्यालय सुविधाओं में हुआ सुधार
जम्मू-कश्मीर के विद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं में भी सुधार हुआ है। विद्यार्थी उपस्थिति दर 75.9 प्रतिशत और शिक्षक उपस्थिति 87.5 प्रतिशत तक पहुंच गई है। इसके अलावा पीने के जल और बालिकाओं के लिए शौचालय की उपलब्धता में भी सुधार दर्ज किया गया है।
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छोटे विद्यालयों की संख्या बनी चुनौती
हालांकि रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि जम्मू-कश्मीर में छोटे विद्यालयों की बढ़ती संख्या शिक्षा के प्रभावी संचालन में बाधा बन सकती है। इसलिए सरकार को बुनियादी ढांचे की कमी, शिक्षकों की संख्या में कमी और डिजिटल शिक्षा की उपलब्धता जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे, ताकि जम्मू-कश्मीर की शिक्षा व्यवस्था में हो रहे सुधार को बनाए रखा जा सके।
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ए.एस.ई.आर. 2024 रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में भी बुनियादी साक्षरता और गणना कौशल में सुधार देखा गया है। हालांकि, छोटे स्कूलों की संख्या में वृद्धि और बहु-स्तरीय शिक्षण की चुनौतियां सामने आई हैं। डिजीटल शिक्षा का विस्तार हो रहा है, जहां 14-16 वर्ष के 90 प्रतिशत से अधिक विद्यार्थियों के घरों में स्मार्टफोन उपलब्ध हैं, लेकिन इसके प्रभावी उपयोग के लिए संसाधनों की जरूरत बनी हुई है।
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विद्यालयों में छात्र और शिक्षक उपस्थिति दर में वृद्धि हुई है, साथ ही शुद्ध पेयजल और कार्यात्मक शौचालयों की उपलब्धता में भी सुधार दर्ज किया गया है। हालांकि, शिक्षकों की कमी, स्कूल अधोसंरचना की चुनौतियां और छोटे विद्यालयों का बढ़ता अनुपात अभी भी चिंता का विषय बना हुआ है, जिसके लिए सरकारी हस्तक्षेप की आवश्यकता है।
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