Edited By Neetu Bala, Updated: 30 Jan, 2026 05:32 PM

इस संबंध में थाना घगवाल में FIR नंबर 13/2026, धारा 303(2) के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है और आगे की जांच जारी है।
घगवाल (लोकेश) : सांबा जिले के घगवाल थाना क्षेत्र में खैर लकड़ी की अवैध कटाई और तस्करी का गंभीर मामला सामने आया है। क्षेत्र में लंबे समय से चल रही इस अवैध गतिविधि पर हाल ही में घगवाल पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई ने एक बार फिर वन संपदा की सुरक्षा को लेकर कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस को विश्वसनीय सूत्रों से सूचना मिली थी कि सुराड़ा क्षेत्र से अवैध रूप से काटी गई खैर लकड़ी को वाहन के माध्यम से ले जाया जा रहा है। सूचना के आधार पर थाना घगवाल पुलिस टीम ने NHW टापयाल नाके पर वाहन जांच के दौरान एक महिंद्रा लोड कैरियर (पंजीकरण नंबर जेके 08एफ-0119) को रोका। जांच में वाहन में खैर लकड़ी के कई लट्ठे पाए गए, जिनके संबंध में कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जा सके। प्रारंभिक जांच में यह लकड़ी राज्य व निजी भूमि से अवैध रूप से काटी गई पाई गई। पुलिस ने वाहन सहित लकड़ी को मौके पर ही जब्त कर लिया। इस संबंध में थाना घगवाल में FIR नंबर 13/2026, धारा 303(2) के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है और आगे की जांच जारी है।
पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस अवैध कटाई और तस्करी के पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, यह मामला केवल एक वाहन तक सीमित नहीं है। घगवाल थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली पंचायत रतवाना और सुराड़ा में पिछले काफी समय से रात के अंधेरे में खैर के पेड़ों की बड़े पैमाने पर अवैध कटाई की जा रही है, जबकि सुंब, गोरन और ब्लेतर इलाकों में सरकार द्वारा परमिशन खोली गई है। उसकी आड़ में पेड़ों को अवैध तरीके से काटा जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ स्थानों पर कथित खुली परमिशन की आड़ में नियमों की अनदेखी करते हुए खैर के हरे-भरे पेड़ों को काटा जा रहा है। कटाई के बाद लकड़ी को गांवों के समीप ही डंप कर दिया जाता है, जिससे न केवल अवैध तस्करी को बढ़ावा मिलता है, बल्कि ग्रामीणों की सुरक्षा और पर्यावरण पर भी खतरा पैदा हो रहा है।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि खैर लकड़ी से जुड़े सभी डंपों की तत्काल और निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही यदि किसी स्थान पर वैध अनुमति के तहत कटाई हो रही है, तो डंप गांवों से दूर स्थापित किए जाएं ताकि अवैध गतिविधियों पर प्रभावी रोक लग सके। ग्रामीणों का कहना है कि खैर जैसे बहुमूल्य और संरक्षित वृक्ष की अंधाधुंध कटाई से क्षेत्र के जंगल तेजी से खत्म हो रहे हैं। यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो आने वाली पीढ़ियों को इसका गंभीर खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। अब क्षेत्र की जनता की नजरें पुलिस और वन विभाग की संयुक्त कार्रवाई पर टिकी हैं कि क्या इस अवैध कारोबार पर वास्तव में लगाम लगाई जाएगी या फिर यह खेल यूं ही चलता रहेगा।
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