Edited By Sunita sarangal, Updated: 23 Apr, 2026 10:50 AM

स्थानीय पूर्व सरपंच ने बताया कि बुधवार सुबह सेना द्वारा इस बंदोबस्ती रास्ते को अचानक बंद कर देने से स्कूली बच्चों और कामकाजी लोगों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा।
उधमपुर(रमेश): उधमपुर के एमनिशन मोड़ से वार्ड नंबर-4 पंचायत अप्पर रैंबल चोपड़ा में स्थित पंचकाडा को जोड़ने वाले रास्ते को सेना द्वारा अचानक बंद किए जाने से स्थानीय निवासियों में भारी आक्रोश व्याप्त हो गया है। इस कार्रवाई के विरोध में ग्रामीणों ने धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया है और स्पष्ट किया है कि जब तक समस्या का समाधान नहीं होता, उनका विरोध जारी रहेगा।
स्थानीय पूर्व सरपंच ने बताया कि बुधवार सुबह सेना द्वारा इस बंदोबस्ती रास्ते को अचानक बंद कर देने से स्कूली बच्चों और कामकाजी लोगों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा। उन्होंने दावा किया कि यह मार्ग 1947 से भी पहले का है और ऐतिहासिक रूप से राजा-महाराजाओं के समय से उपयोग में लाया जा रहा है, जिसे बंद करना अनुचित है।
पूर्व सरपंच के अनुसार पहले भी तीन बार इस रास्ते को बंद करने का प्रयास किया गया था, लेकिन नायब तहसीलदार की रिपोर्टों के आधार पर इसे बहाल रखा गया क्योंकि सरकारी रिकॉर्ड में यह एक पुख्ता रास्ता है। हाल ही में जब ग्रामीणों ने जिला उपायुक्त से मिलने की योजना बनाई, तो सेना के अधिकारियों ने उनसे बातचीत की पेशकश की थी।
मंगलवार को एक प्रतिनिधिमंडल ने सेना के अधिकारियों से मुलाकात की, जहां अधिकारियों ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए वैकल्पिक मार्ग देने की बात कही। हालांकि ग्रामीणों ने इस प्रस्ताव को यह कहकर ठुकरा दिया कि वैकल्पिक मार्ग से 200 मीटर की दूरी बढ़कर ढाई किलोमीटर हो जाएगी, जिससे बच्चों और बुजुर्गों को काफी परेशानी होगी।
इस मामले को लेकर ग्रामीण जिला उपायुक्त से भी मिले थे, जिन्होंने सैन्य अधिकारियों से बात कर समाधान निकालने का आश्वासन दिया था। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि बुधवार को सेना ने पहले सड़क पर नई तारकोल बिछाने का बहाना बनाकर रास्ता बंद किया, लेकिन बाद में इसे उच्च आदेशों का हवाला देकर पूरी तरह बंद कर दिया।
इस मार्ग के बंद होने से न केवल ग्रामीणों का आवागमन प्रभावित हुआ है, बल्कि वहां स्थित गुरुद्वारे जाने का रास्ता भी रुक गया है, जिससे सिख समुदाय में गहरा रोष है। पूर्व सरपंच ने चेतावनी दी है कि यदि जिला प्रशासन जल्द ही इस मामले को नहीं सुलझाता है, तो वे कानूनी कार्रवाई के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे।
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