Edited By Sunita sarangal, Updated: 26 May, 2026 05:35 PM

दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को जेल में बंद बारामूला के सांसद शेख अब्दुल राशिद उर्फ इंजीनियर राशिद को 25 जून से 30 जून तक अंतरिम जमानत दे दी
श्रीनगर(मीर आफताब): दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को जेल में बंद बारामूला के सांसद शेख अब्दुल राशिद उर्फ इंजीनियर राशिद को 25 जून से 30 जून तक अंतरिम जमानत दे दी, ताकि वह अपने पिता की मृत्यु के बाद होने वाले रीति-रिवाजों में शामिल हो सकें।
हालांकि जस्टिस प्रतिभा एम सिंह और जस्टिस मधु जैन की बेंच ने राशिद से कहा कि वह 2 जून को सरेंडर कर दें। यह आदेश 18 मई को उनके पिता के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए दी गई अंतरिम ज़मानत की अवधि खत्म होने के बाद दिया गया।
राशिद के वरिष्ठ वकील ने कोर्ट से गुज़ारिश की कि सांसद को दी गई अंतरिम ज़मानत की अवधि बढ़ा दी जाए। सांसद पर टेरर फंडिंग के आरोप हैं। वकील ने कहा कि ज़मानत बढ़ाने से राशिद श्रीनगर में अपने पिता को दफनाए जाने के 40वें दिन होने वाले कुछ रीति-रिवाजों में शामिल हो पाएंगे।
कोर्ट ने आदेश दिया कि 18 मई को दी गई अंतरिम जमानत की अवधि 2 जून को खत्म होने के बाद अपीलकर्ता सरेंडर कर देगा। हालांकि, 25 जून से 30 जून तक की अवधि के लिए, अपीलकर्ता को 40वें दिन होने वाले रीति-रिवाजों और समारोहों में शामिल होने के लिए फिर से अंतरिम जमानत दी जाती है।
कोर्ट ने कहा कि 25-30 जून तक दी गई अंतरिम जमानत की शर्तें वही होंगी जो राशिद की मौजूदा रिहाई के दौरान लागू हैं। 18 मई को बेंच ने राशिद की अंतरिम ज़मानत की अवधि के लिए कई शर्तें तय की थीं। इनमें यह शर्त भी शामिल थी कि उनके साथ हमेशा सादे कपड़ों में कम से कम दो पुलिसकर्मी रहेंगे। ये पुलिसकर्मी तिहाड़ जेल से यात्रा शुरू होने से लेकर श्रीनगर से उनकी वापसी तक उनके साथ रहेंगे।
कोर्ट ने कहा था कि उन्हें कब्रिस्तान या किसी अन्य पूजा स्थल पर जाने की अनुमति होगी, लेकिन उन्हें अपने घर से बाहर कहीं और जाने की अनुमति नहीं होगी। 28 अप्रैल को कोर्ट ने उन्हें एक सप्ताह की अंतरिम ज़मानत दी थी, ताकि वह श्रीनगर में अपने बीमार पिता से मिल सकें। बाद में इस अवधि को 10 मई तक बढ़ा दिया गया था, क्योंकि राशिद के पिता को इलाज के लिए यहां AIIMS में भर्ती कराया गया था।
बता दें कि सांसद राशिद पर टेरर फंडिंग मामले में मुकदमा चल रहा है। उन पर आरोप है कि उन्होंने जम्मू-कश्मीर में अलगाववादियों और आतंकी गुटों को फंडिंग की। 2017 के एक मामले में नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) द्वारा गिरफ़्तार किए जाने के बाद से, वह 2019 से दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद हैं।
अक्टूबर 2019 में चार्जशीट में नाम आने के बाद मार्च 2022 में एक विशेष NIA अदालत ने राशिद और अन्य लोगों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 120B (आपराधिक साजिश), 121 (सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ना), और 124A (राजद्रोह) के तहत, और सख्त 'गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम' के संबंधित प्रावधानों के तहत आरोप तय किए।
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