₹2 करोड़ का मानहानि का मामला, शोपियां कोर्ट ने 6 कीटनाशक डीलरों को दी अंतरिम राहत

Edited By Neetu Bala, Updated: 02 Aug, 2026 01:56 PM

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साथ ही, कोर्ट ने मेटा प्लेटफॉर्म्स को निर्देश दिया है कि वे वादियों द्वारा बताए गए फेसबुक लिंक की जांच करें और लागू कानूनों व कानूनी दायित्वों के तहत आपत्तिजनक कंटेंट को हटाने या उस तक पहुंच बंद करने पर विचार करें।

शोपियां ( मीर आफताब )  :  शोपियां के प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट जज की अदालत ने एक वकील को छह कीटनाशक डीलरों के खिलाफ मानहानि करने वाला कोई भी कंटेंट पब्लिश या सर्कुलेट करने से रोक दिया है। साथ ही, कोर्ट ने मेटा प्लेटफॉर्म्स को निर्देश दिया है कि वे वादियों द्वारा बताए गए फेसबुक लिंक की जांच करें और लागू कानूनों व कानूनी दायित्वों के तहत आपत्तिजनक कंटेंट को हटाने या उस तक पहुंच बंद करने पर विचार करें।

यह आदेश प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट जज महमूद चौधरी ने शोपियां के छह कीटनाशक डीलरों द्वारा वकील अब्दुल बासित भट और मेटा प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ दायर सिविल मुकद्दमे में अंतरिम राहत की मांग वाली अर्जी पर दिया। वादियों ने ₹2 करोड़ के हर्जाने की मांग की है। उनका आरोप है कि फेसबुक पर पब्लिश किए गए मानहानि वाले वीडियो और बयानों से उनकी प्रतिष्ठा, गुडविल और कारोबार को भारी नुकसान पहुंचा है।

मुकद्दमे के अनुसार, वादियों का आरोप है कि वकील अपनी फेसबुक प्रोफाइल के जरिए कीटनाशक डीलरों के खिलाफ झूठी और मानहानि वाली जानकारी फैला रहे थे। उनका दावा है कि इस कंटेंट का मकसद उनकी प्रतिष्ठा को खराब करना था और इससे उनके कारोबार को काफी नुकसान हुआ है। मुकद्दमे में यह भी कहा गया है कि इन आपत्तिजनक वीडियो को बड़ी संख्या में लोगों ने देखा और शेयर व कमेंट्स के जरिए ये व्यापक रूप से फैल गए।

कोर्ट ने अपने सामने पेश किए गए सबूतों पर विचार करने के बाद पाया कि आवेदकों ने अंतरिम सुरक्षा पाने के लिए प्रथम दृष्टया (Prima Facie) मामला बना लिया है। साथ ही, कोर्ट ने माना कि मुकद्दमे के निपटारे तक दोनों पक्षों के अधिकारों की रक्षा करना ही उचित है।

अर्जी के निपटारे और सुनवाई की अगली तारीख तक, कोर्ट ने पहले प्रतिवादी (वकील) को वादियों के बारे में ऐसा कोई भी कंटेंट पब्लिश, अपलोड, रीपोस्ट या सर्कुलेट करने से रोक दिया है, जिसे मुकद्दमे में मानहानि करने वाला या अपमानजनक बताया गया है।

कोर्ट ने दूसरे प्रतिवादी के तौर पर शामिल मेटा प्लेटफॉर्म्स को भी निर्देश दिया कि वे वादियों द्वारा विशेष रूप से बताए गए URL और लिंक की जांच करें। यदि वे शिकायत वाले कंटेंट से मेल खाते हैं, तो लागू कानूनों और कानूनी दायित्वों के तहत अपने अधिकार क्षेत्र और कानूनी क्षमता के भीतर ऐसे कंटेंट को हटाने या उस तक पहुंच बंद करने की कार्रवाई करें।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अंतरिम आदेश में की गई टिप्पणियां अस्थायी हैं और केवल अंतरिम राहत की अर्जी के निपटारे तक ही सीमित हैं। कोर्ट ने कहा कि इन निष्कर्षों को मुख्य मुकद्दमे के गुण-दोष पर कोई राय नहीं माना जाएगा, मुख्य मुकद्दमे का फैसला सभी पक्षों को सुनने के बाद स्वतंत्र रूप से किया जाएगा। मामले को कोर्ट द्वारा तय की गई अगली तारीख पर आगे की कार्यवाही के लिए सूचीबद्ध किया गया है।

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