Edited By Neetu Bala, Updated: 04 Sep, 2026 07:31 PM

इसी दिन सिख समुदाय की ओर से भव्य नगर कीर्तन निकाला गया। नगर कीर्तन ख़्वाजा बाग से शुरू होकर छठी पातशाही, ओल्ड टाउन शेर-ए-खास बारामूला में संपन्न हुआ।
बारामूला ( रेजवान मीर ) : उत्तरी कश्मीर के ऐतिहासिक शहर बारामूला में शुक्रवार को एक ही दिन मुस्लिम, सिख और हिंदू समुदायों की ओर से धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। तीनों समुदायों के धार्मिक आयोजनों के दौरान आपसी भाईचारे, शांति, सौहार्द और एकता की खूबसूरत मिसाल देखने को मिली। ईद मिलाद-उन-नबी के अवसर पर दरगाह आलिया शेर-ए-खास बारामूला में पैगंबर हज़रत मोहम्मद से जुड़े मुकद्दस तबर्रुकात की ज़ियारत कराई गई। नमाज़-ए-फ़ज्र, ज़ुहर, असर और मग़रिब के बाद श्रद्धालुओं को तबर्रुकात की ज़ियारत कराई गई, जहां बड़ी संख्या में लोगों ने पहुंचकर अकीदत और सम्मान का इज़हार किया।
इसी दिन सिख समुदाय की ओर से भव्य नगर कीर्तन निकाला गया। नगर कीर्तन ख़्वाजा बाग से शुरू होकर छठी पातशाही, ओल्ड टाउन शेर-ए-खास बारामूला में संपन्न हुआ। इसमें सिख समुदाय के हजारों लोगों ने श्रद्धा और उत्साह के साथ भाग लिया।
नगर कीर्तन के दौरान आपसी भाईचारे की एक खूबसूरत तस्वीर उस समय देखने को मिली जब मुस्लिम समुदाय के लोगों ने मार्ग में श्रद्धालुओं और नगर कीर्तन में शामिल लोगों के लिए पानी और जूस के स्टॉल लगाए। इस पहल को सांप्रदायिक सौहार्द और इंसानी भाईचारे की मिसाल के तौर पर सराहा गया।

वहीं, हिंदू समुदाय की ओर से जन्माष्टमी के अवसर पर भव्य झांकी निकाली गई, जो महर्षि कश्यप एम्प्लॉइज कॉलोनी से शुरू होकर रघुनाथ मंदिर, बारामूला चौक तक पहुंची। झांकी में हिंदू समुदाय के लोगों ने बड़ी संख्या में भाग लिया और भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव को श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया।
तीनों धार्मिक कार्यक्रम शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुए। इस दौरान विभिन्न समुदायों के लोगों ने एक-दूसरे के धार्मिक आयोजनों का सम्मान करते हुए बारामूला की गंगा-जमुनी तहज़ीब, आपसी भाईचारे और धार्मिक सौहार्द की मिसाल पेश की।
तीनों समुदायों के लोगों ने कार्यक्रमों को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए जिला प्रशासन, जम्मू-कश्मीर पुलिस और आम जनता का आभार व्यक्त किया। पुलिस की ओर से भी विभिन्न स्थानों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे, जिसके चलते सभी कार्यक्रम शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संपन्न हुए।
एक ही दिन तीनों समुदायों के धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन बारामूला से शांति, एकता और भाईचारे का मजबूत संदेश देता है। धर्म अलग हो सकते हैं, पर इंसानियत, शांति और भाईचारा हम सभी को जोड़ते हैं। बारामूला ने एक बार फिर “विविधता में एकता” की खूबसूरत मिसाल पेश की है।

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