Edited By Neetu Bala, Updated: 02 Mar, 2026 03:18 PM

सोमवार को कश्मीर के उन इलाकों में अधिकारियों ने लोगों की आवाजाही पर कड़ी पाबंदियां लगा दीं जहां अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के विरोध में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए।
श्रीनगर ( मीर आफताब ) : पूरे जम्मू-कश्मीर में हालात तनावपूर्ण चल रहे हैं। सोमवार को कश्मीर के उन इलाकों में अधिकारियों ने लोगों की आवाजाही पर कड़ी पाबंदियां लगा दीं जहां अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के विरोध में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए। अधिकारियों ने बताया कि लाल चौक स्थित प्रतिष्ठित घंटाघर को चारों ओर बैरिकेड लगाकर सील कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि प्रदर्शनकारियों के जमावड़े को रोकने के लिए शहर भर में बड़ी संख्या में पुलिस और अर्धसैनिक बल CRPF कर्मियों को तैनात किया गया है। खामेनेई की हत्या शनिवार को तेहरान में हुए हवाई हमले में हुई जो ईरान पर इजरायल-अमेरिका के संयुक्त हमले का हिस्सा थी। ईरानी सरकारी मीडिया ने रविवार को इसकी पुष्टि की जिसके बाद भारत समेत दुनिया भर में विरोध प्रदर्शन और शोक की लहर दौड़ गई।
एक अधिकारी ने बताया कि कश्मीर जहां लगभग 15 लाख शिया रहते हैं, में लाल चौक, सैदा कदल, बडगाम, बांदीपोरा, अनंतनाग और पुलवामा में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए। प्रदर्शनकारी अमेरिका और इजरायल विरोधी नारे लगाते हुए अपनी छाती पीटते नजर आए। अधिकारियों ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए एहतियाती उपाय के तौर पर ये प्रतिबंध लगाए गए हैं। उन्होंने बताया कि शहर में प्रवेश करने वाले महत्वपूर्ण चौराहों पर तार और बैरिकेड्स लगाए गए हैं।
घाटी के अन्य जिलों के शिया बहुल इलाकों में भी इसी तरह की पाबंदियां लागू की गई हैं। ये प्रतिबंध मुतहिदा मजलिस-ए-उलेमा (एमएमयू) के अध्यक्ष मीरवाइज उमर फारूक द्वारा दिए गए एक दिवसीय हड़ताल के आह्वान के मद्देनजर लगाए गए हैं। मीरवाइज ने कहा, “हम लोगों से एकता, गरिमा और पूर्ण शांति के साथ इसका पालन करने का आग्रह करते हैं।” एमएमयू की हड़ताल के आह्वान का कई राजनीतिक दलों ने समर्थन किया जिनमें विपक्षी PDP अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती भी शामिल हैं। मुफ्ती ने कहा, “ईरान के सर्वोच्च नेता की शहादत पर मीरवाइज उमर फारूक के बंद के आह्वान के प्रति हम अपना पूर्ण समर्थन और एकजुटता व्यक्त करते हैं। यह शोक का दिन है जो दुनिया को याद दिलाता है कि कहीं भी होने वाला अन्याय पूरे मुस्लिम समुदाय और सत्य के लिए खड़े सभी लोगों को आहत करता है।”
अधिकारियों ने छात्रों की सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए एहतियाती उपाय के तौर पर निजी स्कूलों सहित सभी शिक्षण संस्थानों को दो दिनों के लिए बंद कर दिया है।

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