SKICC में Gandhi Jayanti कार्यक्रम, LG सिन्हा ने सत्य और अहिंसा के महत्व पर दिया जोर

Edited By Neetu Bala, Updated: 02 Oct, 2026 08:37 PM

gandhi jayanti event at skicc

गांधी जयंती के मौके पर जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने महात्मा गांधी के विचारों को याद करते हुए एक अहम संदेश दिया है।

श्रीनगर ( मीर आफताब ) : गांधी जयंती के मौके पर जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने महात्मा गांधी के विचारों को याद करते हुए एक अहम संदेश दिया है। शुक्रवार को उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि तेजी से बदलती दुनिया में महात्मा गांधी के सत्य, अहिंसा, आत्मनिर्भरता, सम्मान और सामाजिक जिम्मेदारी के आदर्श आज भी प्रासंगिक हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि तकनीकी प्रगति मानवीय मूल्यों और समझ-बूझ से निर्देशित होनी चाहिए।

श्रीनगर के SKICC में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए LG सिन्हा ने कहा कि 2 अक्टूबर कैलेंडर की महज एक तारीख नहीं है, बल्कि नागरिकों के लिए गांधी के जीवन, अन्याय का विरोध करने के उनके तरीके, आत्मनिर्भरता पर उनके जोर और सम्मान के साथ जीने की उनकी प्रतिबद्धता पर विचार करने का अवसर है।

उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी एक बहुमूल्य विरासत छोड़ गए हैं, जिसकी विचारधारा आज के समाज और दुनिया के लिए महत्वपूर्ण सबक देती है।

गांधी के बचपन को याद करते हुए सिन्हा ने कहा कि महात्मा राजा हरिश्चंद्र की कहानी से गहरे प्रभावित थे और उन्होंने सत्य के प्रति समर्पित रहने का संकल्प लिया था। उन्होंने कहा कि गांधी का जीवन यह दिखाता है कि मुश्किल हालात में भी उन्होंने सत्य का साथ नहीं छोड़ा।

उपराज्यपाल ने शिक्षा के बारे में गांधी की समझ पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि गांधी सीखने की प्रक्रिया को एक ऐसी यात्रा मानते थे जिसके जरिए कोई व्यक्ति जीवन की गहराई और उद्देश्य को समझ सकता है। उन्होंने कहा कि गांधी ने सत्य को उस यात्रा का एक अनिवार्य हिस्सा माना था।

भारत की आजादी की लड़ाई, खासकर 1942 के 'भारत छोड़ो आंदोलन' में गांधी की भूमिका को याद करते हुए सिन्हा ने कहा कि उनके "भारत छोड़ो" के आह्वान ने देश भर के लोगों - बच्चों, युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों - को एकजुट किया।

मौजूदा तकनीकी दौर का जिक्र करते हुए सिन्हा ने कहा कि तकनीक, डिजिटल संचार और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ने रोजमर्रा की जिंदगी को बदल दिया है और अभूतपूर्व अवसर पैदा किए हैं। इससे दूर-दराज के गांवों के लोग जानकारी हासिल कर पा रहे हैं और छात्र दुनिया भर के शिक्षकों से जुड़ पा रहे हैं।

सिन्हा ने कहा, "तकनीक सिर्फ हमारा एक साधन है और फैसला लेने का अधिकार इंसानों के हाथ में होना चाहिए।" उन्होंने जोर दिया कि मशीनें इंसानी समझ-बूझ की जगह नहीं ले सकतीं।

उन्होंने कहा कि तकनीक ने लोगों को पहले से कहीं ज्यादा जोड़ा है, लेकिन इससे अकेलापन भी बढ़ सकता है। साथ ही, आज उपलब्ध जानकारी के विशाल भंडार के कारण सच और झूठ के बीच फर्क करना मुश्किल होता जा रहा है।  उन्होंने कहा, "हमारे पास समुद्र के बारे में जानकारी तो है, लेकिन सच का पता लगाना पहले से कहीं ज़्यादा मुश्किल हो गया है।"

सिन्हा ने चेतावनी दी कि गलत संदेश कुछ ही सेकंड में दुनिया भर में फैल सकते हैं, जबकि सच को बताने में कहीं ज़्यादा समय लग सकता है। उन्होंने कहा कि गांधी ने सोशल मीडिया, स्मार्टफ़ोन या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बिना भी सच और झूठ के रिश्ते को समझा था और सच की खोज में अपनी ज़िंदगी को एक प्रयोग की तरह जिया था।

Lieutenant Governor ने कहा कि गांधी ने कभी यह दावा नहीं किया कि उनके पास ही सच है; उन्होंने कहा कि सच को दूसरों पर थोपा नहीं जाना चाहिए।
उन्होंने कहा, "सच एक महान अभ्यास है," और इसे जवाब देने से पहले जांचने, सुनने और समझने की आदत बताया।

सिन्हा ने कहा कि ये सिद्धांत युवाओं के लिए खास तौर पर ज़रूरी हैं और छात्रों से अपील की कि वे मोबाइल फ़ोन, टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल ज़िम्मेदारी और नैतिकता के साथ करें।

उन्होंने गांधी के सामाजिक एकता के संदेश पर भी ज़ोर दिया और कहा कि भारत की विविधता ऐतिहासिक रूप से उसकी ताक़त रही है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग रीति-रिवाज़, परंपराएं और पूजा-पद्धतियां एक साथ चल सकती हैं, जबकि लोग एक समाज के तौर पर मिलकर आगे बढ़ते रहें।

समाज के सबसे कमज़ोर व्यक्ति पर गांधी के ज़ोर को याद करते हुए सिन्हा ने कहा कि फ़ैसले लेते समय हाशिए पर रहने वाले लोगों के अनुभवों और हितों का ध्यान रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कमज़ोर वर्गों के लिए न्याय, अलग-अलग विचारों का सम्मान और सामाजिक ज़िम्मेदारी के छोटे-छोटे काम सामाजिक एकता को मज़बूत कर सकते हैं।

Lieutenant Governor ने भारत में गांधी के भरोसे का भी ज़िक्र किया; उन्होंने देश के बारे में गांधी की लिखी बातों और इस विश्वास का ज़िक्र किया कि भारत में बड़े सपनों वाले लोगों को अवसर देने की क्षमता है।

आत्मनिर्भरता पर सिन्हा ने कहा कि गांधी की सोच सिर्फ़ बड़े उद्योगों तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसमें गांव, स्थानीय उत्पादक, मज़दूर, छोटे उद्योग और किसान भी शामिल थे।
उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पादन को मज़बूत करने और स्थानीय उत्पादकों को अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों से जोड़ने से आत्मनिर्भर भारत बनाने में मदद मिल सकती है, और ऐसे अवसर पैदा करना सरकार की ज़िम्मेदारी है। आत्म-चिंतन के गांधी के संदेश का ज़िक्र करते हुए सिन्हा ने लोगों से अपील की कि वे दूसरों के कामों पर लगातार सवाल उठाने के बजाय अपने अंदर झाँकें।

उन्होंने लोगों से सोचने को कहा कि क्या वे सच बोल रहे हैं या अफ़वाहें फैला रहे हैं, सार्थक बातचीत कर रहे हैं या बस बोल रहे हैं, और कड़ी मेहनत कर रहे हैं या ज़िम्मेदारी से बच रहे हैं।  युवा छात्रों को संबोधित करते हुए सिन्हा ने कहा कि उनके पास ऐसे अवसर और तकनीकी साधन उपलब्ध हैं जिनकी पिछली पीढ़ियां कल्पना भी नहीं कर सकती थीं, जिनमें स्मार्टफोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और भारी मात्रा में जानकारी शामिल है।

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