Edited By Neetu Bala, Updated: 30 Sep, 2026 02:10 PM
श्रीनगर ( मीर आफताब ) : जम्मू-कश्मीर में अब अनरजिस्टर्ड और अनरेगुलेटेड डिजिटल और सोशल मीडिया न्यूज़ प्लेटफॉर्म पर शिकंजा कसने की तैयारी है। सरकार जल्द ही Media Policy 2026 जारी करने जा रही है। इस पॉलिसी के जरिए गुमराह करने वाली और मनगढ़ंत जानकारी फैलाने वाले प्लेटफॉर्म और अकाउंट्स की जवाबदेही तय करने की बात कही गई है। सरकार ने यह जानकारी विधानसभा में MLA बशीर अहमद शाह वीरी के सवाल के जवाब में दी।
सदन में जवाब देते हुए, मंत्री सकीना इटू ने कहा कि, इन्फॉर्मेशन डिपार्टमेंट ने कहा कि अनरजिस्टर्ड और अनरेगुलेटेड डिजिटल और सोशल मीडिया न्यूज़ चैनलों द्वारा गुमराह करने वाली और झूठी जानकारी फैलाने के मुद्दे पर 2026 के पिछले बजट सेशन के दौरान डिटेल में चर्चा की गई थी, जिसमें अलग-अलग पॉलिटिकल पार्टियों के विधायकों ने इस बात पर ज़ोर दिया था।
सरकार ने कहा कि इस मुद्दे को असरदार तरीके से सुलझाने के सरकार के वादे के मुताबिक, इन्फॉर्मेशन डिपार्टमेंट जल्द ही न्यू मीडिया पॉलिसी, 2026 जारी करने जा रहा है, जिसमें प्रिंट मीडिया के अलावा, ऑनलाइन न्यूज़ मीडिया प्लेटफॉर्म्स के रजिस्ट्रेशन और रेगुलेशन के लिए जरूरी नियम शामिल किए गए हैं ताकि उनकी जवाबदेही पक्की हो सके।”
सरकार ने आगे कहा कि अली मोहम्मद सागर की अगुवाई वाली हाउस कमेटी ऑन गवर्नमेंट एश्योरेंस की 30 जुलाई, 2026 की मीटिंग में जारी निर्देशों के मुताबिक, इन्फॉर्मेशन डिपार्टमेंट पूरी गाइडलाइंस/SOPs बनाएगा।
इस प्रस्तावित सिस्टम के तहत ज़िला एडमिनिस्ट्रेशन को अपने-अपने ज़िलों में चल रहे अनरजिस्टर्ड सोशल मीडिया न्यूज़ हैंडल्स की डिटेल्ड लिस्ट रखनी होगी। सरकार ने कहा कि अगर कोई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के ज़रिए झूठी, गुमराह करने वाली या मनगढ़ंत जानकारी फैलाता हुआ पाया जाता है, तो इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट, 2000, भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 के ज़रूरी नियमों के तहत केस दर्ज किए जाएंगे।
इसमें यह भी कहा गया कि J&K होम डिपार्टमेंट ने केंद्र शासित प्रदेश में साइबर क्राइम को रोकने, उनका पता लगाने और जांच करने की कोशिशों में तालमेल बिठाने के लिए, डायरेक्टर जनरल ऑफ़ पुलिस, J&K के सुपरिंटेंडेंस और कंट्रोल में J&K साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (JK4C) बनाया है।
सरकार ने कहा कि डायरेक्टरेट ऑफ़ इन्फॉर्मेशन एंड पब्लिक रिलेशंस (DIPR), J&K का सोशल मीडिया सेल, अपने खास फेक/गुमराह करने वाले न्यूज़ मॉनिटरिंग सिस्टम के ज़रिए प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया में आने वाली खबरों को रेगुलर ट्रैक और जांचता है।
इसमें कहा गया, “जैसे ही कोई खबर फेक या गुमराह करने वाली पाई जाती है, उसका जवाब डिपार्टमेंट के सोशल मीडिया हैंडल्स के ज़रिए रियल-टाइम बेसिस पर जारी किया जाता है।”
डिपार्टमेंट ने कहा कि ऐसे जवाब अखबारों के अगले एडिशन में छपने के लिए भी भेजे जाते हैं और ऑफिशियल DIPR वेबसाइट पर अपलोड किए जाते हैं।
सरकार ने प्रस्तावित J&K मीडिया पॉलिसी का भी ज़िक्र किया और कहा कि इसमें फेक न्यूज़, प्लेजरिज्म और गलत या देश विरोधी गतिविधियों के लिए कंटेंट की मॉनिटरिंग के अलावा, मीडिया हाउस को डी-एम्पैनल करने या कुछ जगहों पर सरकारी विज्ञापन रोकने से जुड़े प्रोविज़न भी हैं।
जवाब में सोशल मीडिया पोर्टल, YouTube न्यूज़ चैनल और वेबसाइट पर लागू मौजूदा कानूनी फ्रेमवर्क के बारे में भी बताया गया, जिसमें इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट, 2000 और इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (इंटरमीडियरी गाइडलाइंस और डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड) रूल्स, 2021 शामिल हैं।
इसमें ऑनलाइन नुकसान, पब्लिक ऑर्डर, धमकियों, गलत जानकारी और दूसरे अपराधों से निपटने वाले BNS और BNSS के प्रोविज़न का भी ज़िक्र किया गया, साथ ही आर्टिकल 19(1)(a) के तहत बोलने और बोलने की आज़ादी के संवैधानिक प्रोटेक्शन पर भी ज़ोर दिया गया, जो आर्टिकल 19(2) के तहत सही पाबंदियों के अधीन है।
सरकार ने कहा कि प्रस्तावित रेगुलेटरी फ्रेमवर्क डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अकाउंटेबिलिटी पक्का करते हुए गलत जानकारी को दूर करने की कोशिश करेगा।
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