Jammu: चाय की चुस्कियों पर महंगाई की तपिश, महंगे कमर्शियल LPG सिलैंडरों से बढ़ी छोटे कारोबारियों की चिंता

Edited By Neetu Bala, Updated: 04 May, 2026 03:15 PM

jammu the heat of inflation felt over sips of tea

हाल ही में कमर्शियल एल.पी.जी. सिलैंडर की कीमत में 993 रुपए तक की भारी बढ़ौत्तरी दर्ज की गई, जिसे अब तक की सबसे बड़ी वृद्धि माना जा रहा है

जम्मू :  शहर की सुबह जैसे ही पार्कों में टहलते कदमों, अखबारों की सरसराहट और हल्की ठंडी हवा के साथ करवट लेती है, वैसे ही सड़क किनारे उबलती चाय की केतली जम्मू की सामाजिक संस्कृति की पहली आवाज बन जाती है। मॉर्निंग वॉकरों के लिए यह सिर्फ चाय का एक कप नहीं, बल्कि दिन की शुरुआत का वह ठिकाना है, जहां राजनीति से लेकर शहर की हलचल, महंगाई से लेकर अखबारों की सुर्खियों तक हर मुद्दे पर चर्चा होती है। चाय की यही छोटी-छोटी चौपालें जम्मू की सुबह को एक अलग पहचान देती हैं, लेकिन अब इन चाय चौपालों पर चर्चा का सबसे बड़ा विषय खुद चाय का बढ़ता खर्च बनता जा रहा है।

हाल ही में कमर्शियल एल.पी.जी. सिलैंडर की कीमत में 993 रुपए तक की भारी बढ़ौत्तरी दर्ज की गई, जिसे अब तक की सबसे बड़ी वृद्धि माना जा रहा है। बढ़ौत्तरी का असर अब जम्मू के छोटे चाय स्टॉल संचालकों और ढाबा कारोबारियों पर भी साफ दिखाई देने लगा है। शहर के कई हिस्सों में दुकानदार गैस की बजाय फिर से स्टोव, लकड़ी और कोयले का इस्तेमाल करते नजर आ रहे हैं।

चाय विक्रेता सुभाष गुप्ता का कहना है कि दूध, चीनी, चायपत्ती और अन्य जरूरी सामान पहले ही महंगे हो चुके हैं, ऊपर से कमर्शियल गैस सिलैंडर का बढ़ता खर्च छोटे कारोबारियों पर अतिरिक्त बोझ डाल रहा है।

टी स्टॉल एसोसिएशन जम्मू प्रांत के सचिव रवि कुमार गुप्ता कहना है कि जम्मू शहर में एक हजार से अधिक छोटे-बड़े चाय स्टॉल संचालित हो रहे हैं और हजारों परिवारों का गुजारा इसी व्यवसाय पर निर्भर है। चाय का कारोबार केवल रोजगार का साधन नहीं, बल्कि शहर की सामाजिक संस्कृति का अहम हिस्सा भी है। ऐसे में लगातार बढ़ती लागत छोटे कारोबारियों के लिए चिंता का विषय बनती जा रही है।

फिलहाल एक कप 15 रुपए में बिक रही है चाय

दुकानदारों के अनुसार, फिलहाल एक कप चाय 15 रुपए में बिक रही है, लेकिन यदि सिलैंडर की कीमतों में इसी तरह बढ़ौत्तरी जारी रही तो आने वाले समय में चाय के दाम और बढ़ सकते हैं। उनका कहना है कि ग्राहकों की संख्या बनाए रखने और खर्च संभालने के बीच संतुलन बनाना अब बड़ी चुनौती बन गया है। कुछ चाय स्टॉल संचालकों ने बताया कि मजबूरी में पुराने स्टोव और लकड़ी का सहारा लेना पड़ रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि महंगाई का असर अब सीधे आम आदमी की रोजमर्रा की जिंदगी में दिखाई देने लगा है, जो चाय कभी राहत और बातचीत का जरिया मानी जाती थी, अब वहीं धीरे-धीरे महंगाई की मार का प्रतीक बनती जा रही है।

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